राशन माफिया के ठिकाने पर जांच करते अधिकारी
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जिस राशन माफिया के कारनामों की गूंज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक है। उसने सिस्टम को फिर बौना साबित कर दिया। तीन महीने में सोमवार को दूसरी बार 24 घंटे में छूट गया। उसे राजस्थान पुलिस ने दबोचा, उसके खिलाफ पूर्ति विभाग 24 घंटे में एफआईआर तक दर्ज नहीं करा सका।
मुफ्त बंटने वाले सरकारी राशन के चावल की तस्करी करने वाले खेरागढ़ के आरोपी राशन माफिया सुमित अग्रवाल को उसके आठ साथियों के साथ रविवार को रूपवास पुलिस ने दबोचा था। उसके पास से 300 बोरी सरकारी चावल, एक ट्रॉला व दो कार जब्त की गई थीं। लेकिन, आगरा कमिश्नरेट पुलिस और पूर्ति विभाग लापरवाह बने रहे।
राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद शांतिभंग में मुकदमा लिखा। आरोपियों को सोमवार शाम एसडीएम कोर्ट से जमानत मिल गई। राजस्थान पुलिस का कहना है कि आरोपी ने उनके राज्य में कोई अपराध नहीं किया। जो चावल पकड़ा गया, वह यूपी का था। ऐसे में कार्रवाई का अधिकार भी यूपी का है।
इधर, राशन माफिया के पकड़े जाने के दूसरे दिन पूर्ति विभाग की टीम और थाना खेरागढ़ पुलिस रूपवास पहुंची। जहां से 300 बोरी चावल व अन्य जब्त सामान को अपने सुपुर्दगी में लिया। लेकिन, आगरा में नई एफआईआर दर्ज नहीं हो पाने से माफिया छूट गया।
कमिश्नरेट में दर्ज हैं चार मुकदमे
आरोपी सुमित अग्रवाल व उसके साथियों पर आगरा पुलिस कमिश्नरेट में 4 मुकदमे दर्ज हैं। आखिरी बार 10 सितंबर को रायभा में एक घर में बने गोदाम पर छापा मारकर 270 बोरी चावल मामले में सुमित व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। जिला पूर्ति अधिकारी संजीव सिंह का कहना है कि मंगलवार को आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। कमिश्नरेट पुलिस दोबारा गिरफ्तार करेगी।
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खुलेगी हिस्ट्रीशीट, घोषित होगा माफिया
डीसीपी पश्चिमी जोन सोनम कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ 4 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें दो थाना खेरागढ़, एक-एक अछनेरा और कागाराैल थाना में दर्ज हैं। सभी आवश्यक वस्तु अधिनियम में लिखे गए हैं। आरोपी की हिस्ट्रीशीट खोलने की तैयारी है। इसके लिए विधिक प्रक्रिया चल रही है। वहीं राशन माफिया भी घोषित किया जाएगा।