आगरा। युवा कल्याण विभाग में फर्जी मस्टररोल के आधार पर भुगतान के आरोप में निलंबित चल रहे तत्कालीन वरिष्ठ सहायक आलोक माहेश्वरी को विभाग ने सोमवार को अंतिम नोटिस जारी कर दिया। सेवानिवृत्ति के छह महीने बाद भी सरकारी दस्तावेजों का चार्ज नहीं सौंपा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह में अभिलेख हस्तांतरित नहीं किए गए तो उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने बताया कि आलोक माहेश्वरी पर पीआरडी स्वयंसेवकों को फर्जी मस्टररोल के आधार पर ड्यूटी भत्ते का भुगतान करने का गंभीर आरोप था। उन्होंने क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारियों के प्रमाणीकरण और जिलाधिकारी की मंजूरी के बिना लाखों रुपये का भुगतान पारित कर दिया था। सरकारी कामकाज में लापरवाही और मनमानी कार्यप्रणाली के चलते महानिदेशक युवा कल्याण एवं पीआरडी ने 24 जनवरी, 2026 को उन्हें निलंबित कर अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की थी। निलंबन अवधि के दौरान 31 जनवरी, 2026 को माहेश्वरी सेवानिवृत्त हो गए।
सेवानिवृत्ति के बावजूद माहेश्वरी ने अब तक चार्ज नहीं सौंपा है, जिससे विभागीय कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है। इससे पहले 8 मई, 2026 को भी उनके आवास पर नोटिस भेजा गया था लेकिन घर पर कोई उपस्थित नहीं मिला। यदि वह एक सप्ताह के अंदर कार्यालय में उपस्थित होकर प्रभार नहीं सौंपते हैं तो महानिदेशालय के निर्देशों के क्रम में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।