10 वर्षों में दोगुना हुए मरीज
आगरा चेस्ट फिजीशियन एसोसिएशन के डॉ. संजीव लवानियां ने बताया कि बीते 10 वर्षों में वायु प्रदूषण से सांस रोग के मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। पहले ओपीडी में आने वालेे सांस रोग के मरीजों में से 90 फीसदी में धूम्रपान और 10 फीसदी में वायु प्रदूषण के कारण बीमारी मिलती थी। अब 80 फीसदी में कारण धूम्रपान और 20 फीसदी में वायु प्रदूषण हो गया है। वायु प्रदूषण से दमा और टीबी का मर्ज भी बिगड़ रहा है।
बिगड़ रहा है टीबी और दमे का मर्ज
एसएन के वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि धुएं में कार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड समेत अन्य खतरनाक गैसें होती हैं। ये सांस के जरिये फेफड़ों में पहुंचतीं हैं। इससे टीबी और दमा के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। मौसम बदलते वक्त, खासतौर से सर्दियों की शुरूआत में हवा में अधिक प्रदूषण होने के कारण टीबी के मरीजों में बलगम में खून, सांस रोगियों में सांस फूलना और दमा के मरीजों में जकड़न की समस्या बढ़ जाती है।
ये करें उपाय
- हवा को प्रदूषित करने वाले स्रोतों को सख्ती से बंद करें।
- फैक्टरी में हवा की निकासी के बेहतर इंतजाम किए जाएं।
- सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों पर सख्ती बरती जाए।
- वाहनों की फिटनेस की सख्ती से जांच की जाए।
- निर्माण कार्य करते वक्त धूल-धुआं रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करें।
- लोग मास्क का उपयोग करें।
- पौष्टिक भोजन और मौसमी फलों का सेवन करें।
- नियमित सांस का व्यायाम और योग करें।
- जैसा कि डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया