कभी एयरक्राफ्ट के लिए पैराशूट के पार्ट्स आयात किए जाते थे लेकिन अब एयरक्राफ्ट ही स्वदेशी बनाया जा रहा है। यह सब एमएसएमई सेक्टर की मजबूती से हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय मापदंड की क्वालिटी रखने के लिए एमएसएमई उद्योगों को रिसर्च और इनोवेशन करने होंगे। अन्यथा बाजार में टिक नहीं पाएंगे। स्वदेशी उत्पाद आयात किए गए सामान से कई गुना सस्ते पड़ते हैं लेकिन क्वालिटी भी उसी के मुताबिक बनाए रखनी होगी। यह कहना है एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) के निदेशक वैज्ञानिक देवाशीष चक्रवर्ती का।
वह एमएसएमई और नेशनल चेंबर की ओर से फाउंड्री नगर के पीपीडीसी सेंटर में लगाए गए दो दिवसीय नेशनल एक्सपो का उद्घाटन करने के बाद उद्यमियों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और नई तकनीकी ज्ञान को अपने उत्पाद में शामिल करें और उत्पाद के डिजाइन और डिलीवरी पर फोकस करें।
उत्तर मध्य रेलवे के एडीआरएम दिलीप सिंह ने कहा कि रेलवे एमएसएमई का बड़ा खरीदार है। मेट्रो ट्रेन समेत रेलवे को कई उत्पाद चाहिए। रेलवे के 50 उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है जिनके डिजाइन देखकर एमएसएमई सेक्टर उन्हें बना सकता है। एमएसएमई के उपनिदेशक वीएम झा ने कहा कि नेशनल वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम से आयात कम हो रहा है। आगरा के लिए यह मौका है, जब वह पब्लिक सेक्टर कंपनियों से आर्डर हासिल कर सकता है।
तकनीकी सत्र में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में मथुरा रिफाइनरी, एनटीपीसी, नरोरा एटामिक पावर स्टेशन के अधिकारियों ने खरीदे जाने वाले उत्पाद और टेंडर की प्रक्रिया की जानकारी दी।
इस दौरान नेशनल चेंबर अध्यक्ष अशोक गोयल, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम मैनेजर संजय यादव, उपनिदेशक इंद्रजीत यादव, एमके मीना, सहायक निदेशक ब्रजेश यादव, कुमर सिंह सोनी, एनए रजा, एसएस गंगवार, सुधीर गौतम, अवधेश कुमार, विजय सिंह राणा तथा सुशील यादव आदि मौजूद रहे।
फाउंड्री नगर के उद्यमी नहीं पहुंचे
एमएसएमई का नेशनल एक्सपो पहली बार यमुनापार फाउंड्री नगर में लगा है लेकिन वहां के ही उद्यमी एक्सपो में नहीं आए। चेंबर अध्यक्ष अशोक गोयल के अलावा चेंबर के सदस्य एक्सपो में नहीं पहुंचे जबकि चेंबर इस एक्सपो का सह आयोजक था। फाउंड्री नगर की इकाइयों को यहां कई पब्लिक सेक्टर कंपनियां मिलती, जिनमें वह अपने माल की सप्लाई कर सकते थे, लेकिन हर बार की तरह आगरा के उद्यमियों ने एक्सपो से किनारा किया, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों से उद्यमी पहुंचे।