आगरा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह वीबी-जीरामजी करने की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने शनिवार को कड़ी आलोचना की। उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना जघन्य अपराध है।
संजय प्लेस स्थित कैंप कार्यालय पर सुमन ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के बाद भी यह योजना सफल नहीं हो पाएगी। इसमें 125 दिन रोजगार की गारंटी का दावा किया जा रहा है। हकीकत यह है कि 2020-21 से 2024-25 तक औसतन 50 दिन रोजगार मिला है। जबकि मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी। ऐसे में अब कैसे 125 दिन रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा में पहले केंद्र का अंश 90 प्रतिशत और राज्य का अंश 10 प्रतिशत था। जिसे जीरामजी योजना में केंद्र का अंश 60 प्रतिशत और राज्य का 40 प्रतिशत अंश कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्य कर्ज में डूबे हुए हैं। वह 40 प्रतिशत अंशदान कैसे दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना में ग्राम पंचायतों की स्वायतता भी छीनी जा रही है। पहले मनरेगा से कार्यों का प्रस्ताव ग्राम पंचायत स्तर पर बनता था। अब केंद्र एक एजेंसी नामित करेगा। सुमन ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से भाजपाइयों को चिढ़ है। यह गोडसे के मानने वाले हैं। वार्ता के दौरान सपा नेता धर्मेंद्र यादव, मुईन बाबा, राजपाल बाबा आदि मौजूद रहे।