हर रोज कूड़ा बीनने वाले हाथों में शुक्रवार को कलम-किताब नजर आई। जुबां पर ‘अलिफ’ से ’अल्लाह’, तो ‘पे’ से ‘प्यार’। उनके लिए यह पैगाम भले ही किताबी हो, लेकिन धर्मांतरण के जो जख्म दिल-ओ-दिमाग पर हैं, उसे अक्षर ज्ञान से ठीक करने की कवायद में उलमा जुट गए हैं।
देवरी रोड स्थित वेद नगर की बस्ती में शुक्रवार को कई उलमा ने बच्चों से लेकर बड़ों तक को मजहबी और स्कूली पाठ्यक्रम की किताबें बांटीं। जमीन पर तिरपाल बिछाकर इन्हें आल इंडिया तहरीक-ए-सुन्नियत के जिलाध्यक्ष हाजी मौलाना मसरूर रजा कादरी ने तालीम देना शुरू किया।
कुछ बच्चे दीनी तालीम से थोड़ा वाकिफ थे, पर अधिकांश के लिए यह नया और अनूठा अनुभव था। हाथों में किताब देख बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखर गई।
‘बस यह जारी रहे’
रेहान ने कहा कि हमें तो यह किताबें पहली बार पकड़ने को मिली हैं। मगर, अच्छा लग रहा है। नाजमा ने कहा कि सोचा नहीं था कि हमें कभी पढ़ने का मौका भी मिलेगा। यह सिलसिला जारी रहे। उलमा-ए-अहिले सुन्नत तंजीम के सदर मुफ्ती मोहम्मद मुदस्सिर खान कादरी ने कहा कि इनकी दीक्षा जारी रहेगी। पूरे देश की तंजीम इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं।
मुंबई से आ सकते हैं उलमा
मौलाना अरशदर्रहमान कादरी ने कहा कि यहां पर इनके पढ़ाई-लिखाई का इंतजाम किया जाएगा। यह घटना बहुत ही निंदनीय है। इसी को लेकर मुंबई से रजा एकेडमी के उलमा का एक प्रतिनिधि मंडल आगरा पहुंच सकता है।