सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट, फॉलो और शेयर के लिए रील्स के दीवानों ने नोट को पैम्फलेट बना दिया। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलोवर, सब्सक्राइबर बढ़ाने के लिए नोट पर लिखकर फरियाद की जा रही है। रील्स के दीवानों की कारगुजारी आरबीआई की स्वच्छ नोट नीति को दाग लगा रही है।
इन नोटों का हो रहा इस्तेमाल
10, 20 या 50 ही नहीं 100 और 500 के नोट को भी प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है। बैंक शाखाओं में भी इन नोटों को नोटिस में नहीं लिया जाता। बाजार से बैंक शाखाओं में जाकर ये नोट लोगों तक फिर लौट आते हैं। आगरा के अलावा भी यूपी के कई जिलों में प्रचार का तरीका इस्तेमाल हो रहा है।
दौलत के साथ शोहरत भी
रील्स बनाने वालों को दौलत के साथ शोहरत भी हासिल हो रही है। यूट्यूब और इंस्ट्रा पर रील्स अपलोड करने वाले माह में मोटी कमाई कर रहे हैं। ये रकम फालो और सब्सक्राइब करने के लिहाज से है।
नोटों पर लिखने से इनकी कम हो जाती उम्र
नोटों पर लिखने से इनकी उम्र कम हो जाती है। जानकारों के मुताबिक ऐसे नोटों की वजह से हर साल 2638 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। नोटों पर प्रचार करने वाले हैं कि मानते नहीं। इनके आगे बैंकों के नोटों को स्वच्छ रखने का प्रचार फीका है।