'मेरे पास रिपोर्ट नहीं, डीएफओ से पूछिए'
जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने कहा कि पिछले साल कितने पौधे लगे, कितने मर गए। इसका आकलन कराया जा चुका है। मेरे पास रिपोर्ट नही हैं। वर्तमान स्थिति के बारे में डीएफओ जानकारी देंगे।
हमारे जिंदा, दूसरों की पता नहीं
डीएफओ व नोडल अधिकारी अखिलेश पांडेय ने कहा कि हमारे 100 फीसदी पौधे जिंदा हैं और विभागों का हमें पता नहीं। पिछले साल लगे पौधों का सत्यापन चल रहा है। विभागों से रिपोर्ट नहीं आई है। जिलाधिकारी की बैठक में पौधरोपण अभियान की भौतिक स्थिति पर चर्चा की जाएगी।
बारिश खत्म होने को, नहीं लगे सात लाख पौधे
इस साल 45 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य जिले को मिला था। प्रशासन ने एक दिन में 38 लाख पौधे लगाने का दावा किया था। मानसून विदा होने की कगार पर है, लेकिन बाकी सात लाख पौधे नहीं लगे हैं। जुलाई में एक दिन में 38 लाख पौधरोपण का दावे पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि एक दिन में 38 लाख पौधे नहीं लगाए जा सकते। इतने पौधे लगाने के लिए क्या मैकेनिज्म है, प्रशासन सार्वजनिक करें। वहीं, डीएफओ अखिलेश पांडेय का कहना है कि बारिश अच्छी नहीं होने के कारण शेष सात लाख पौधे नहीं लग सके हैं, उन्हें लगवाया जाएगा।
नर्सरियों में रखे है 25 लाख पौधे
जिले में 35 से अधिक सरकारी व निजी नर्सरियां हैं। जहां पौधे रखे रह गए। वनस्पति विज्ञानी एसपी शर्मा का कहना है कि निजी खर्च से जिन लोगों ने नर्सरियों से पौधे खरीदे हैं, वही लगे हैं। नर्सरियों से इस बार अधिक पौध का उठान नहीं हुआ है। नर्सरियों में करीब 25 लाख पौधे अभी रखे हैं।
10 वर्ग किलोमीटर घटी हरियाली
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की मार्च 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 2017 में 272 वर्ग किलोमीटर हरियाली क्षेत्र था जो 2019 में 262.62 वर्ग किलोमीटर रह गया। करीब 10 वर्ग किलोमीटर हरित क्षेत्र में कमी आई है, जबकि ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में हरियाली बढ़ाने के लिए पिछले एक दशक में 9 करोड़ पौधे रोपे गए हैं।