पहले प्राइवेट कंपनी और अब नगर निगम, दोनों की व्यवस्था में डोर टू डोर कचरा नहीं उठाया जा रहा। मैने एक जगह से डस्टबिन हटवाया तो दूसरी कॉलोनी के गेट पर अवैध डलाबघर बना दिया। लोगों के घर से कचरा उठ रहा है तो कॉलोनी के गेट पर कचरा कैसे पहुंच रहा है।
- राहुल चौधरी पार्षद, आजमपाड़ा
ये केवल नारा है कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा। अगर ऐसा है तो उनकी नाक के नीचे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, डस्टबिन घोटाला कैसे हो गया और कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई। अब भी दोनों व्यवस्थाएं ठप हैं। कागजों पर करोड़ों का भुगतान किया जा रहा है। ये भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता क्या।
- शिरोमणि सिंह पार्षद, घटिया आजम खां
एक-दो गलियों को छोड़कर कहीं भी डोर टू डोर कूड़ा नहीं लिया जा रहा। घरों से कचरा उठ भी रहा है तो मोहल्ला प्रथा के सफाईकर्मी उठा रहे हैं। नगर निगम की गाड़ियां केवल मेन रोड से निकलती दिखती हैं, कूड़ा लेने अंदर नहीं पहुंचतीं। हम लोग कई बार शिकायतें कर चुके, पर प्रभारी सख्ती नहीं कर सके।
- प्रियंका प्रजापति पार्षद, खातीपाड़ा
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की गड़बड़ियों को हमने उजागर किया ताकि व्यवस्था सुधरे, लेकिन कोई सुधार ही नहीं हुआ। नगर निगम के अधिकारी केवल मशीनों की खरीद, कमीशनखोरी में लगे हैं। बिना निगम सदन की सहमति के करोड़ों की खरीद की जा रही है, पर कचरा उठाने की व्यवस्था सुधर नहीं पाई।
- रवि बिहारी माथुर पार्षद, पीपलमंडी
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