साजिया के पैर जिनकी अंगुलियों को चूहे कुतर कर खा गए
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कहते हैं गरीबी इन्सान को सिर्फ भूखा नहीं रखती बल्कि उसे तिल-तिल मरने के लिए मजबूर कर देती है। 14 साल की साजिया अब्बासी की कहानी कुछ ऐसी ही रही। जब साजिया मात्र ढाई महीने की थी, तब चूहों ने उसके दोनों पैरों की दसों अंगुलियां कुतर दी थीं। तब से आज तक, यह मासूम न केवल अपनी विकलांगता, बल्कि उन जख्मों से उठने वाली असहनीय पीड़ा के साथ जीने को मजबूर है।
अमर उजाला ने साजिया के दर्द पर मरहम लगाने के लिए पहल की। मुहिम सोमवार को रंग लाई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अरुण श्रीवास्तव ने साजिया के इलाज के लिए चिकित्सकों का पैनल गठित कर दिया है। मंगलवार से साजिया का इलाज शुरू होगा। उसकी दसों अंगुलियों की प्लास्टिक सर्जरी होगी।
समाजसेवी चौधरी दिलीप सिंह ने बताया कि साजिया का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। मां दूसरे के घरों में झाड़ू-पोछा करती है और पिता दिहाड़ी मजदूरी। पांच लोगों के इस परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि साजिया का सही इलाज करा सकें। आलम यह है कि बरसात के दिनों में पैरों के घावों में सड़न और कीड़े तक पड़ जाते हैं।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मासूम के इलाज के निर्देश दिए। सोमवार को सीएमओ अरुण कुमार श्रीवास्तव ने डिप्टी सीएमओ को निर्देशित किया है कि मंगलवार को एसएन मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल साजिया का उपचार शुरू करेगा। इस दौरान दिव्यांग एकता संगठन के अध्यक्ष बॉबी गोला और समाजसेवी ब्रजेश कुशवाह भी साथ रहे।