आगरा। जोधपुर झाल सिर्फ पक्षियों का ठिकाना नहीं, बल्कि प्रकृति के ऐसे अनकहे रिश्तों का भी साक्षी है। यहां वर्षों से देखे जा रहे ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (काली गर्दन वाला सारस) के एक नर पक्षी की कहानी स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों को आज भी भावुक कर देती है।
साल 2017 में सर्वेक्षण ने दौरान पहली बार ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क का एक जोड़ा जोधपुर झाल में देखा गया था। शुरुआत में दोनों केवल रात बिताने आते थे और सुबह होते ही उड़ जाते थे। अगले ही वर्ष, 2018 में उन्होंने जोधपुर झाल को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया। दोनों को अक्सर साथ-साथ भोजन तलाशते और शांत जल के किनारे समय बिताते देखा जाता था लेकिन 2023 में यह साथ टूट गया। एक जंगली जानवर के हमले में मादा पक्षी की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के बाद नर पक्षी करीब 15 दिनों तक अपनी साथी के शव के आसपास ही मंडराता रहा। उसे बार-बार उसी स्थान पर देखा गया, जहां मादा पक्षी ने अंतिम सांस ली थी।
करीब 15 दिन बाद वह भी जोधपुर झाल से गायब हो गया। लगभग आठ-दस दिन बाद वह दो अन्य ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क के साथ फिर दिखाई दिया। कुछ दिनों तक तीनों जोधपुर झाल में रहे, लेकिन जल्द ही वे भी उड़ गए। इसके बाद लगभग दो वर्षों तक उस नर पक्षी की कोई जानकारी नहीं मिली। वर्ष 2025 की सर्दियों में जोधपुर झाल ने एक बार फिर उसी परिचित पक्षी का स्वागत किया। इस बार वह एक नई मादा के साथ लौटा। तब से दोनों यहीं रह रहे हैं और अक्सर साथ दिखाई देते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी. सिंह बताते हैं कि ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क भारत के सबसे दुर्लभ और संवेदनशील आर्द्रभूमि पक्षियों में से एक है। यह प्रजाति सामान्यत लंबे समय तक एक ही जोड़े में रहती है और अपने पसंदीदा आवास पर बार-बार लौटने की प्रवृत्ति रखती है। पक्षी के साथी के मरने पर पक्षी विज्ञान में इस प्रकार के व्यवहार को शोक-सदृश व्यवहार और दीर्घकालिक जोड़ी-बंधन का संकेत माना जाता है।