श्री रंगनाथ मंदिर में आयोजित हो रहे उत्सव में रंगनाथ जी साथ गोदा जी।
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वृंदावन (मथुरा)। श्री धाम वृंदावन नित्य उत्सवों की लीला भूमि है। कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के चलते यहां भले ही आज भगवान अपने भक्तों से अवश्य दूर हैं, लेकिन मंदिरों में परंपरागत उत्सव और त्योहारों को उत्साह बना हुआ है। दक्षिण भारत की मीरा कही जाने वाली गोदांबा का 10 दिवसीय उत्सव श्री रंगनाथ मंदिर में मनाया जा रहा है। जिन्होंने श्री रंगनाथ को पति रूप में वरण किया।
इन दिनों वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में गोदांबा जी का उत्सव मनाया जा रहा है। यह 10 दिन तक चलने वाला उत्सव गोदांबा जी के जन्मदिवस तक आयोजित होगा। उत्सव के इन 10 दिनों में 4000 पद जिन्हें पासुर कहा जाता है का पाठ हो रहा है। इसमें गोदम्मा जी द्वारा लिखे 143 पासुरों का पाठ भी शामिल है। रंगनाथ मंदिर की सीईओ अनघा निवासन बताती हैं कि गोदांबा जी का उत्सव हरियाली तीज के अगले दिन तक चलेगा। इन दिनों परंपरागत रूप से मंदिर में आयोजन हो रहा है।
मीरा और आंडाल दोनों कृष्ण भक्त
आंडाल ने अल्पायु में ही दो ग्रंथों की रचना की, जो भक्ति के श्रेष्ठ ग्रंथ माने जाते हैं। तिरूप्पावै-यह अति सुंदर 30 पदों का मुक्तक काव्य है। इसमें कृष्ण को प्राप्त करने के लिए कात्यायनी देवी की पूजा एवं व्रतानुष्ठान का वर्णन है। नच्चीयार तुरुमोली ग्रंथ में 143 पदों में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन है। आंडाल को गोदांबा के नाम से पहचाना जाता है। इनका जन्म 715 ईसवी के आसपास का माना जाता है। अपने शोध प्रबंध मीरा-आंडाल का तुलनात्मक अध्ययन में डॉ. एन. सुंदरम लिखते हैं कि मीरा और आंडाल दोनों कृष्ण भक्त हैं। यह दोनों ही अपनी परा भक्ति द्वारा भगवान श्री कृष्ण के विराटत्व में एकाकार हो गई हैं। मीरा और आंडाल ने अपने पदों में जन्म जन्मांतरों के लिए विराटत्व में एकाकार होने की भावना व्यक्त की है।ऽ
- गोपाल शरण शर्मा, प्रकाशन अधिकारी, ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, गोदाविहार वृंदावन