राजा जनक ने जानकी के स्वयंवर में भगवान शिव के धनुष पर डोरी चढ़ाने की शर्त रखी। कई राज्यों के राजा पहुंचे लेकिन कोई धनुष को हिला तक नहीं सका। तब राजा जनक और महारानी सुनयना को विचलित देख गुरु विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम ने डोरी चढ़ाई, धनुष टूट गया। श्रीराम के जयकारे गूंज उठे। पता चलने पर भगवान परशुराम क्रोध में पहुंचे। बृहस्पतिवार को रामलीला मैदान में यह मंचन किया गया।
मुख्य मंच पर स्वयंवर के लिए राजा जनक का दरबार सजाया गया। धनुष टूटते ही बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखे संवाद ने दर्शकों को रोमांचित किया। श्रीराम में नारायण का रूप देख भगवान परशुराम का क्रोध शांत हो गया। जानकी अपनी सखियों के साथ रथ पर सवार होकर स्वयंवर में पहुंचीं। यह शोभायात्रा लाला चन्नोमल की बारादरी से रामलीला मैदान तक निकाली गई। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल, राजीव अग्रवाल, मुकेश जौहरी, अंजुल बंसल, आनंद मंगल आदि मौजूद रहे।
आज निमंत्रण लीला का मंचन
रामलीला महोत्सव में 27 सितंबर को निमंत्रण लीला का मंचन किया जाएगा। मीडिया प्रवक्ता राहुल गौतम ने बताया कि शाम 7 बजे से रामलीला मैदान पर लीला का मंचन किया जाएगा।