अंशुल की शिकायत पर सिकंदरा थाने की पुलिस ने 21 नवंबर 2018 को राजू को हिरासत में लिया। राजू को उसकी मां के सामने ही पुलिस ने बेरहमी से पीटा। मां रेनू ने पुलिस से गुहार लगाई थी कि बेटा चोरी नहीं कर सकता मगर पुलिस नहीं पसीजी। हवालात में दूसरे दिन राजू की तबीयत बिगड़ी। पुलिस उसे अस्पताल ले गई, तब तक मौत हो गई।
ये भी पढ़ें - UP: महिला ऑटो चालक से दरिंदगी...होटल में ले गए, एक ने खुद को बताया फौजी; फिर बारी-बारी लूटी आबरू
हिरासत में मौत पर वैश्य समाज ने मोर्चा खोल दिया था। कई दिन बवाल हुआ। पोस्टमार्टम में राजू के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले थे। आंदोलन के बाद पुलिस ने अंशुल, पड़ोसी विवेक और अज्ञात पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या का केस लिखा था। विवेचना लोहामंडी थाने से कराई गई।
विवेचक ने अंशुल प्रताप, दरोगा अनुज सिरोही और विवेक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या में चार्जशीट लगाई थी। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर मुकदमे की विवेचना सीआईडी को ट्रांसफर की गई थी। घटना के वक्त प्रभारी इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह पर प्रभार था।
ये भी पढ़ें - UP: जिस बेशकीमती जमीन के लिए पुलिस ने बेगुनाह परिवार को भेजा था जेल, उसमें बिल्डर समेत नौ को क्लीनचिट
चार्जशीट में तत्कालीन इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह, दरोगा ज्ञानेंद्र शर्मा, दरोगा तेजवीर सिंह, मुख्य आरक्षी रामकिशन, देवेंद्र सिंह, राकेश कुमार, रंजीत, आरक्षी हरीशचंद्र, बृजेश कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर हिमांक कुमार, आरक्षी संजीव कुमार, राजेश, सतेंद्र सिंह, संजीव, अनिल कुमार, जोगेश कुमार और आरक्षी चालक संजय कुमार आरोपी बने हैं। एसपी सीआईडी राजेंद्र यादव ने बताया कि लोहामंडी पुलिस ने जिन तीन लोगों के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। वे भी मुकदमे में आरोपी हैं। अभियोजन की स्वीकृति शासन से मिलने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी होगी।