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साफ कर दी राजेश्वर महादेव की राह

Wed, 29 Jul 2015 02:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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शहर में अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत संयुक्त टीम ने मंगलवार को राजेश्वर महादेव मंदिर मार्ग को साफ किया। इंद्रापुरम चौराहा से लेकर कहरई मोड़ तक करीब 45 अतिक्रमण ध्वस्त किए गए। मंदिर की आड़ लेकर बनीं पांच दुकानों को भी ध्वस्त कर किया गया। एक नेताजी ने अभियान में अड़चन डालने की कोशिश की तो उन्हें एसपी सिटी ने पकड़वाकर हवालात की हवा खिलवा दी।
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सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान, एसीएम एमपी सिंह, नगर निगम के अधिशासी अभियंता राजीव  कुमार राठी, एडीए के इंजीनियर राजेश शर्मा दो बुल्डोजर, नगर निगम के कर्मचारी और पुलिस फोर्स के साथ दोपहर करीब ढाई बजे इंद्रापुरम चौराहे पर पहुंच गए। यहां से राजेश्वर मंदिर की अभियान चलाया गया। मुनादी सुबह ही कर दी गई थी। इसके चलते अधिकांश खोखे वाले, ठेल वाले और अन्य अस्थायी अतिक्रमण करने वालों ने अपने अतिक्रमण दोपहर तक हटा लिए थे।
सबसे पहले मंदिर के पास स्थित पांच दुकानों को ढहाया गया। मंदिर कमेटी भी इन दुकानों का विरोध कर रही थी। टीम जब आगे बढ़ी तो समाजवादी पार्टी के एक नेताजी ने रैंप तोड़ने का विरोध किया। पहले तो उन्होंने रैंप पर खड़ी अपनी कार नहीं हटाई। इस पर एडीए और नगर निगम की टीम ने पैमाइश करके नेताजी को दिखाई। बावजूद इसके नेताजी नहीं माने। राजीव राठी ने बताया कि उन्होंने न केवल गाली गलौज की बल्कि धमकी भी थी। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने एसपी सिटी को घटना की जानकारी दी।
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एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह मौके पर पहुंच गए। एसपी के निर्देश पर नेताजी को हिरासत में लेकर हवालात में डाल दिया। राजीव राठी ने बताया कि आरोपी सपा नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। उनकी रैंप ढहा दी गई है। इसके बाद शमसाबाद रोड पर स्थित एक मार्बल की दुकान के बाहर रखे सामान को भी हटवा दिया गया। कहरई मोड़ तक सड़क को साफ कर दिया गया है।
इनबाक्स...
घटिया से यमुना किनारा तक निरीक्षण
शमसाबाद रोड पर जाने से पहले अधिकारियों ने घटिया चौराहा से यमुना किनारा तक मार्च किया। निरीक्षण के दौरान घटिया चौराहे पर एक प्याऊ की आड़ में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। वहां के एक होटल संचालक को कुछ दिन की मोहलत दी थी। होटल संचालक ने अधिकांश निर्माण तोड़ दिया है शेष के लिए पांच दिन की मोहलत दी गई है। यमुना किनारा तक करीब 14 ऐसे भवन चिह्नित किए गए थे, जिनके काफी हिस्से को ध्वस्त करना था। इन सभी भवनों में औसतन 40-80 फीसदी तक तोड़फोड़ की कार्यवाही हुई। सभी मालिकों को पांच दिन का समय दिया गया है।
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