फोटो 20 किशनी क्षेत्र में खेतों में पड़ी धान की फसल। संवाद
मैनपुरी। पिछले दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। एक तरफ किसान बार-बार हो रही बारिश के चलते अपने खेतों में खड़ी धान की फसल की कटाई और मड़ाई नहीं कर पा रहा है। वहीं दूसरी तरफ आलू की फसल पर भी संकट छाया हुआ है। हाल में खेतों में की गई आलू की बुवाई के बाद पानी भरने से आलू खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
एक पखवाड़ा पहले हुई जोरदार बारिश से धान के खेतों में पानी भर गया था। इससे धान की फसल की कटाई और आलू की बुवाई प्रभावित हुई थी। पिछले एक सप्ताह से लोग धान की कटाई और मढ़ाई के साथ आलू की बुवाई का कार्य कर रहे थे। इसी बीच मौसम ने एक बार फिर से करवट ली। सोमवार दोपहर से शुरू हुई हल्की बारिश का दौर मंगलवार शाम तक रुक रुककर चलता रहा है। हवा के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी धान की फसल को बिछा दिया है।
अब फसल इस प्रकार की हो गई है कि इसे कंबाइन मशीन से नहीं कटा जा सकता है। कुछ लोगों ने धान की कटाई कर फसल को मड़ाई के लिए एकत्रित कर लिया था वह भी पूरी तरह भीग गई है। किसानों द्वारा खेतों में ही त्रिपाल और पॉलिथीन आदि से धान की फसल को बचाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन, नाकाफी है। वहीं आलू की फसल में पानी भरने से बुवाई किए गए आलू के सड़ने का खतरा दिख रहा है।
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किसान झेल रहा दोहरी मार
गांव रठेरा निवासी किसान आराम सिंह का कहना था कि किसान पर इस बार दोहरी मार पड़ रही है। बार-बार की बारिश के चलते धान की कटाई नहीं हो पा रही है वहीं धान की फसल के दाम भी गिर रहे हैं। बादाम सिंह का कहना था कि दो दिन पहले ही उन्होंने आलू की बुवाई की थी बारिश होेने के कारण खेत में पानी भर गया है।
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समय से पहले महसूस हुई सर्दी
पिछले दो दिन से हुई बारिश ने मौसम में बड़ा परिवर्तन किया है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 17 डिग्री नापा गया जबकि अधिकतम तापमान 27 डिग्री। अक्तूबर के अंत में न्यूनतम तापमान 17 डिग्री आने से लोगों को सर्दी महसूस हुई। लोगों को समय से पहले ही गर्म कपड़े निकालने पड़े। बाइक सवारों को सर्दी से ठिठुरते हुए देखा गया। बच्चों और बुजुर्गों की दिक्कतें समय से पहले आई सर्दी ने बढ़ा दी हैं।
फोटो 20 किशनी क्षेत्र में खेतों में पड़ी धान की फसल। संवाद
फोटो 20 किशनी क्षेत्र में खेतों में पड़ी धान की फसल। संवाद