आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर तैनात एक लिपिक रेलवे में नौकरी का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी कर रहा था। रेलवे में भर्ती के लिए उसने कोलकाता में किराए का फ्लैट लेकर फर्जी ट्रेनिंग सेंटर खोला हुआ था, जिसमें फर्जी तरीके से ट्रेनिंग भी दिलवाता था।
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वर्ष 2016 में हुई रेलवे भर्ती के लिए उसने ग्वालियर और दतिया के 11 लोगों से 42 लाख रुपये हड़प लिए थे। इस मामले में ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने क्लर्क और उसके बेटे रवि को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। आगरा के रेलवे अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
रेलवे में नौकरी न लगने पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) में भर्ती कराने झांसा दिया। मुंबई में ले जाकर अभ्यर्थियों को गुमराह किया था। शुक्रवार को भी पीड़ित डीआरएम कार्यालय में पहुंचे, लेकिन अवकाश के कारण कोई अफसर नहीं मिला।
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पिता-पुत्र ने 42 लाख रुपए हड़पे
न्यू जनता कालोनी, मुस्तफा क्वार्टर में रहने वाला राममिलन राजपूत और उसका बेटा रवि राजपूत नौकरी दिलवाने के नाम पर 42 लाख रुपये हड़पने के बाद जेल में हैं। आगरा में कार्यरत कई रेल कर्मचारी भी उसके संपर्क में थे। हालांकि रेलवे ने अभी तक आरोपी लिपिक की जांच शुरू नहीं की है, लेकिन इस खेल में अन्य कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।
शुक्रवार को डीआरएम कार्यालय पहुंचे राजेंद्र राजपूत ने ही आरोपी के खिलाफ ग्वालियर में मुकदमा दर्ज करवाया है। राजेंद्र ने बताया कि आरोपी क्लर्क राममिलन उसका रिश्तेदार (बहनोई) लगता है। यही कारण रहा कि वह उसकी बातों में फंस गया।
राजेंद्र ने बताया कि पहले राममिलन ने उसके अलावा मुरैना, दतिया, ग्वालियर के कुछ लड़कों को जाल में फंसाया। वो रेलवे में भर्ती के लिए कोलकाता में एक छोटे से क्वार्टर में ले गया, जहां कथित रेल कर्मियों ने पांच लड़कों को ट्रेनिंग दी।
रेलवे में नहीं लगी नौकरी तो दिया ये झांसा
फिजिकल टेस्ट भी करवाया। इसके बाद मेडिकल भी हुआ। इससे उन्हें भरोसा हो गया कि नौकरी मिल जाएगी। लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने अपना पैसा वापस मांगा। इस पर राममिलन ने कहा कि वह रिश्तेदार है, इसलिए उसकी नौकरी ओएनजीसी में लगवा देगा।
ओएनजीसी में भर्ती के लिए वह मुंबई के मलाड़ इलाके में भेजता था। यहां भी नौकरी नहीं मिलने पर लोगों ने जब पैसा वापसी की मांग की तो राममिलन ने धमकियां देना शुरू कर दिया। इस संबंध में वाणिज्य विभाग के कर्मचारी खामोश हैं। राममिलन की गिरफ्तारी से उनमें खलबली मची हुई है।
डीआरएम कार्यालय पहुंचे पीड़ितों का कहना है कि वो चाहते हैं राममिलन की विभागीय जांच के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त किया जाए। उक्त कर्मचारी के संपर्क में आगरा मंडल के अन्य कर्मचारी भी हो सकते हैं। उसने धौलपुर, आगरा, मथुरा ही नहीं ग्वालियर, मुरैना और दतिया के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर ठगा है, लेकिन लोगों को पास सुबूत नहीं हैं। इसलिए भी कई पीड़ित अभी तक सामने नहीं आए हैं।
पीड़ितों ने बताया कि राममिलन के संबंध कुछ भाजपा नेताओं से हैं। इसी कारण वो धमकाता था। राजेंद्र ने बताया कि वो पत्नी को भी विधानसभा चुनाव में टिकट दिलवाने के प्रयास में था, लेकिन इसी बीच उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो गई। कई दफा उसने पीड़ितों को धमकाया भी था। आगरा आने पर हत्या की धमकी भी दिया करता था। इस डर से लोग आगरा नहीं आते थे।
सात और पीड़ितों के नाम सामने आए
नौकरी के नाम ठगी का शिकार हुए लोगों में राममिलन के पैतृक गांव भउआपुरा, दतिया की प्रियंका राजपूत, रामनारायण बझेड़िया, महेंद्र राजपूत, मुरैना का अविनाश यादव, मथुरा के सुनील, भगत सिंह व ललित शामिल हैं।
फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज होने के बाद लिपिक बीमारी का बहाना बनाकर 30 अक्तूबर से मेडिकल लीव पर है। रेलवे अस्पताल के डॉक्टर से अपना इलाज होना बता रहा है, जबकि 18 नवंबर को पुलिस ने उसे जेल भेज दिया।
अन्य रेलवे कर्मचारियों को भी पूरे प्रकरण की जानकारी है, लेकिन उन्होंने किसी को भनक नहीं लगने दी। जब रेल अधिकारियों को कर्मचारी के जेल में होने की जानकारी मिली तो उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा। वाणिज्य प्रबंधक ने बताया कि लिपिक के रिकॉर्ड की जांच करवाई जा रही है।