तब यमुना लबालब थी, अब सूखी
सिविल सोसाइटी के सदस्य राजीव सक्सेना का कहना है कि ब्रिटिशकाल में जब अनुबंध हुआ था तब यमुना लबालब थी। ओखला, गोकुल बैराज नहीं थे। अब यमुना को सिर्फ 1100 क्यूसेक पानी आगरा के लिए मिलता है। नदी सूखी रहती है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से बुलंदशहर से गंगाजल पाइपलाइन बिछानी पड़ी। ऐसे में सत्संग सभा के अनुबंध की समीक्षा होनी चाहिए।
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अनुबंध की कराएंगे जांच
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शरद सौरभ गिरी ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में हुए अनुबंध की जांच कराई जाएगी। नियम व शर्तों का पालन हुआ या नहीं, जांच के बाद ही शासन को पत्र भेजा जाएगा।