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रासलीला: राधा-कृष्ण के महारास ने मोहा मन, मनाया कृष्ण का जन्मोत्सव

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बाह। बटेश्वर मेले के सांस्कृतिक मंच पर सोमवार को रासलीला में राधा-कृष्ण के महारास ने दर्शकों का मन मोह लिया। मयूर नृत्य पर ब्रज मंडल की कलाकारों ने आभा बिखेरी तो लोग झूम उठे। ब्रजराज राजेश्वरी लीला संस्थान वृंदावन के सुरेश कुमार ब्रजवासी ने बताया कि राधा-कृष्ण के महारास और मयूर नृत्य की प्रस्तुति के साथ ही गोपियों के साथ कन्हैया की हंसी-ठिठोली की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों मोनिका, देवकी, मोहिनी, बबली, संगीता, राधिका आदि ने कृष्ण जन्म के उत्सव में मयूर नृत्य पेश किया। कृष्ण जन्म के उत्सव के दौरान पांडाल राधे-राधे के घोष से गूंज उठा। उत्सव मनाए जाने के लिए ब्रज के लोक गीतों की मनमोहक प्रस्तुति पर जय श्रीकृष्ण के नारे लगे। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य महेश कठेरिया, ध्रुवराज भदौरिया, भाव सिंह नरवरिया, अजय भदौरिया आदि मौजूद रहे। संवाद
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बटेश्वर मेला: घोड़ा बादल के नाच और सर्कस में काम करने वाले खच्चर हिरनी का रहा आकर्षण



सिमटने लगा पशुमेला, गढ़ मुक्तेश्वर के लिए रवाना होने लगे मवेशी

बाह। सिमटने के कगार पर पहुंचे बटेश्वर के पशु मेले में सोमवार का दिन घोड़ा बादल के नाच और सर्कस में काम कर चुके खच्चर हिरनी के नाम रहा। बटेश्वर में ऊंट, गधा के बाद घोड़ा और खच्चर का मेला आखिरी दौर में है। घोड़ा और खच्चर का व्यापारियों ने गढ़ मुक्तेश्वर के मेले के लिए लदान शुरू कर दिया है।



सोमवार को मेले में बरेली के फखरुद्दीन के नकुली घोड़े बादल के नाच का आकर्षण रहा। उन्होंने बादल की खूबियां बताई और कहा कि नाच ही नहीं, दौड़ में भी बादल बेमिसाल है। बताया कि बादल की खुराक पर 900 से 1200 रुपये तक रोजाना खर्च होते हैं। 5.60 लाख रुपये के घोड़े की खरीदारों ने 4 लाख रुपये कीमत लगाई है। बिना बेचे ही गढ़ मुक्तेश्वर के मेला में लदान कर ले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेला में 8 घोड़े बेचे हैं, जिनमें पंजाबी, मारवाड़ी, अबलक और नकुली नस्ल के घोड़े-घोड़ी शामिल हैं। घोड़ा बादल के अलावा सोमवार को खच्चर हिरनी का आकर्षण रहा। आकर्षण के पीछे उसके सर्कस में काम करने की कहानी है। हाथरस के बब्बन ने बताया कि इशारों पर चलने वाले हिरनी ने सर्कस में कई साल काम किया है। अजनबियों को सूंघकर पहचान लेता है। अजनबी दिखने पर घोड़े की तरह से हिनहिनाने लगता है। वह मेले में हिरनी को दिखाने लाए हैं, बेचने नहीं। 18 खच्चर लाए थे, जिनमें से 8 खच्चर अब तक बिक चुके हैं। बताया कि मवेशी लाद कर गढ़ मुक्तेश्वर मेले का रुख कर रहे हैं।
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बटेश्वर मेले से जिला पंचायत ने कमाए 14.50 लाख रुपये, आबाद होने लगा लोक मेला



बाह। बटेश्वर मेला से अब तक जिला पंचायत ने 14.50 लाख रुपये कमाए हैं। मेला अधिकारियों ने बताया कि इसमें पशु रजिस्ट्रेशन और दुकान रजिस्ट्रेशन की आमदनी शामिल है। लोक मेले में दुकानों के आवंटन का काम आखिरी चरण में है। पशु मेले का दायरा सिमटने के साथ ही बटेश्वर में लोक मेले का क्षेत्र आबाद होने लगा है।

मंदिर शृंखला के पास संतों ने अपने अखाड़े जमा लिए हैं। संतों के आगमन का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। मनोरंजन के साधन भी विकसित होने लगे हैं। पत्थर बाजार आबाद होने लगा है। हालांकि सदर बाजार में दुकानदारों की आबक धीमी है। लोक मेले के लिए बटेश्वर की शिव मंदिर शृंखला रोशनी से दमक उठी है। सोमवार को दर्शन पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालु लोक मेला को लेकर बेहद उत्साहित दिखे। पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि लोक मेला के लिए बटेश्वर मंदिर में तैयारी पूरी हो गई है। ब्रह्मलाल महाराज की शृंगार पूजा देखने के लिए श्रद्धालु उमड़ने लगे हैं। संवाद
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