शिक्षक एमएलसी चुनाव की अंतिम मतदाता सूची में फर्जीवाड़े का एक और मामला उजागर हुआ है। तत्कालीन डीआईओएस चंद्रशेखर के स्तर से जांच के बाद जिन स्कूलों के शिक्षकों के आवेदन बाकायदा आदेश जारी कर निरस्त किए गए थे, उन्हीं स्कूलों के नाम पर अंतिम सूची में वोटरों की भरमार है। पांच प्रमुख स्कूलों के उपलब्ध आंकड़ों में आवेदन, निरस्तीकरण और अंतिम सूची में दर्ज नामों के बीच इतना बड़ा अंतर है कि पूरी सत्यापन प्रक्रिया कटघरे में आ गई है।
अमर उजाला ने गत 12 सितंबर को शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची में अपात्र शिक्षकों और ऐसे स्कूलों के नाम शामिल होने का मामला उठाया था, जिनकी पात्रता और अस्तित्व को लेकर सवाल सामने आए थे। अब दस्तावेजों में आवेदन निरस्त होने के बावजूद संबंधित स्कूलों के शिक्षकों के वोटर बनने का मामला सामने आया है।
पांच स्कूलों के आंकड़ों में बड़ा अंतर
कराहरा : 41 आवेदन निरस्त, फिर भी 38 वोटर
कराहरा के हीरारतन कॉलेज से 42 आवेदन आए थे। इनमें सिर्फ एक आवेदन स्वीकार किया गया, जबकि 41 आवेदन 17 नवंबर 2025 को निरस्त कर दिए गए। इसके बावजूद अंतिम मतदाता सूची में इस स्कूल के 38 शिक्षक वोटर बन गए।
फतेहाबाद : छह आवेदन निरस्त, वोटर 78
फतेहाबाद के नेताजी हिम्मत सिंह इंटर कॉलेज से 37 आवेदन आए। इनमें 31 स्वीकार और छह आवेदन निरस्त किए गए। छह आवेदनों को 17 दिसंबर 2025 को निरस्त किए जाने के बावजूद मतदाता सूची में इस स्कूल के 78 वोटर दर्ज हैं।
ककुपुरा : 41 आवेदन स्वीकृत, वोटर 92
ककुपुरा के श्रीमती रामदुलारी देवी इंटर कॉलेज से 41 आवेदन आए और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सभी स्वीकृत हुए। इसके बावजूद मतदाता सूची में इस स्कूल के 92 वोटर दर्ज हैं। यानी आवेदन और अंतिम मतदाता सूची में दर्ज नामों के बीच 51 का अंतर है।
अटूस : 38 आवेदन निरस्त, फिर भी 22 वोटर
अटूस के नारायण इंटर कॉलेज से 43 आवेदन आए थे। इनमें पांच स्वीकृत और 38 निरस्त किए गए। इसके बावजूद अंतिम सूची में इस स्कूल के 22 शिक्षक वोटर दर्ज हैं।
डौकी : 29 आवेदन खारिज, वोटर 44
डौकी के संत आनंद दास जी महाराज इंटर कॉलेज से 42 आवेदन आए। इनमें 13 स्वीकृत और 29 निरस्त किए गए। इसके बावजूद मतदाता सूची में इस स्कूल के 44 शिक्षक वोटर दर्ज हैं।
तत्कालीन डीआईओएस बोले- मेरे वेरीफाई करने के बाद ही बन सकते हैं वोटर
इन आंकड़ों को लेकर तत्कालीन डीआईओएस चंद्र शेखर का कहना है कि उनके स्तर से सत्यापन के बिना कोई शिक्षक वोटर नहीं बन सकता। उन्होंने बताया कि जब तक डीआईओएस वेरीफाई नहीं करते, तब तक वोटर नहीं बन सकते हैं। ये कैसे बने और किसने बनाए, इसकी जानकारी नहीं है। जो भी कर रहा है, वह अपने स्तर से कर रहा है।
माध्यमिक शिक्षक संघ के कोषाध्यक्ष मुकेश शर्मा ने बताया कि डीआईओएस के इस बयान के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि आवेदन की जांच और सत्यापन के बाद ही शिक्षक का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाना था तो जिन आवेदनों को तत्कालीन डीआईओएस स्तर से निरस्त किया गया, उनसे जुड़े नाम अंतिम मतदाता सूची में कैसे पहुंच गए।
जांच समिति बनी, रिपोर्ट का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 सितंबर को खबर प्रकाशन के बाद कमिश्नर और डीआईओएस स्तर से जांच समिति का गठन किया गया है। हालांकि अभी तक समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। यह भी सामने नहीं आया है कि समिति ने अब तक कितने मतदाताओं का सत्यापन किया, कितने नाम पात्र या अपात्र पाए गए और कितने नाम हटाने की कार्रवाई की गई। इधर, चुनाव होने की तिथि घोषित हो चुकी है।
एमएलसी चुनाव-2026 : प्रमुख तिथियां
29 सितंबर — चुनाव की अधिसूचना जारी होगी
6 अक्तूबर— नामांकन की अंतिम तिथि
7 अक्तूबर — नामांकन पत्रों की जांच
9 अक्तूबर— नाम वापसी
23 अक्तूबर— मतदान, सुबह 8 से शाम 4 बजे तक
27 अक्तूबर— मतगणना
आगरा कमिश्नरी में होंगे नामांकन
शिक्षक और स्नातक खंड के एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन आगरा कमिश्नरी में किए जाएंगे। चुनाव में पूर्व की तरह बैलेट पेपर का प्रयोग होगा।
आगरा खंड में 12 जिले
आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, एटा, हाथरस, इटावा, औरैया, कन्नौज और फर्रुखाबाद।
शिक्षक मतदाता सूची में बढ़ोतरी
शुरुआती दौर में: 8,600 मतदाता
दावे-आपत्तियों के बाद बढ़े वोटर: 10,189
स्वीकृत वोटर: 7,780
वर्तमान मतदाता: 16,380 शिक्षक