शहर में विद्युत सप्लाई का जिम्मा संभाल रही टोरंट पावर कंपनी आम आदमी की जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है। भूमिगत केबिल डालने में नियमों को ताक पर रख दिया गया है। आवास विकास कालोनी में डाली गई लाइन की जांच में पता लगा है कि कंपनी ने 1.5 मीटर गहराई के स्थान पर महज 12 से 30 इंच की गहराई पर लाइन डाली है। कुछ स्थानों पर पेयजल की लाइनों के ऊपर ही विद्युत लाइन बिछा दी गई है।
आवास विकास कालोनी में टोरंट पावर ने मार्च में अंडरग्राउंड लाइन बिछाई थी। उस समय कालोनीवासियों ने अनियमितता पाए जाने पर विरोध किया था लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने लोगों को धमका कर लाइन बिछा दी। मामला तहसील दिवस में पहुंचा तो प्रभारी अधिकारी ने नगर निगम और टोरंट पावर के अधिकारियों की संयुक्त टीम से जांच कराने के निर्देश दिए। नगर निगम के अधिशासी अभियंता की ओर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने नियमों को उल्लंघन किया है और 1.5 मीटर गहराई के स्थान पर कहीं 12 इंच तो कहीं 30 इंच गहराई में लाइन बिछाई है। बरसात के दिनों जलभराव होने की दशा में या किसी विशेष प्रयोजन के लिए गड्ढा खोदने की दशा में यहां गंभीर हादसा हो सकता है। अक्टूबर में न्यू आगरा क्षेत्र में एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है। कई जानवर भी चपेट में आ चुके मर चुके हैं।
ये बिजली लाइन की गहराई स्थिति
स्थान केबिल की गहराई
सेक्टर सात (मकान नंबर 717) 27 इंच
सेक्टर सात (मकान नंबर 1422) 33 इंच
सेक्टर एक (मकान नंबर 269) 30 इंच
सेक्टर एक (मकान नंबर 322/2) 12 इंच
सेक्टर एक (मकान नंबर 186) 18 इंच
सेक्टर छह (मकान नंबर 155) 27 इंच
शहर भर में हो रहा है विरोध
आगरा। टोरंट पावर की मनमानी का शहरभर में विरोध हो रहा है। पिछले दिनों शाहगंज के लाल डिग्गी इलाके में क्षेत्रीय लोगों ने पार्षद संदीप उपाध्याय के नेतृत्व में विरोध कर दिया था। ककरैठा क्षेत्र में पार्षद मुकेश यादव ने बिना अनुमति खोदाई करने पर टीम का विरोध किया था और नगर निगम के अधिकारियों को बुलाकर काम बंद करा दिया था। नूरी दरवाजा और नाई की मंडी में भी विरोध हो चुका है।
केबिल बिछी तो कहां लगेंगे पेड़
कंपनी सड़क के किनारे के कच्चे स्थान को खोदकर वहां केबिल बिछा रही है। इसकी वजह से कालोनियों में सड़क के किनारे पेड़ लगाने का स्थान भी खत्म हो रहा है।
तेज भाग रहे टोरंट पावर के मीटर
टोरंट पावर के मीटर भी सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि लोगों के घरों में अनापशनाप बिल पहुंच रहे हैं। आवास विकास निकासी पूर्व पार्षद कपिल वाजपेयी का कहना है कि चार माह पहले आवास विकास कालोनी सेक्टर एक में एक मकान में सबमीटर लगाकर करीब एक महीने तक परीक्षण किया गया था। जो परिणाम आया उसके मुताबिक रीडिंग में करीब 25-30 फीसदी तक का अंतर पाया गया था। कपिल वाजपेयी का कहना है कि टोरंट के इस खेल का खुलासा करने के लिए एक साथ कई घरों में सबमीटर लगाएंगे। नियामक इसकी निष्पक्ष जांच कराएं तो भेद खुल सकता है।
मीटर तेज भागने के आरोप निराधार हैं। ये जर्मनी में बने अत्याधुनिक मीटर हैं। यदि किसी को कोई संदेह है तो मीटर का जांच करा सकता है। रही बात भूमिगत केबिल की तो केबिल सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर ही बिछाई गई है। कहीं, कहीं कम गहराई पर भी केबिल बिछाई जाती है लेकिन सुरक्षा के मानकों का पालन किया जाता है।
भूपेंद्र सिंह, पीआरओ टोरंट पावर