अमर उजाला में 24 नवंबर 1984 को प्रकाशित समाचार के अनुसार, उन्होंने नामांकन दाखिल करने के बाद कहा कि वह राम के हनुमान नहीं, बल्कि रावण के घर विभीषण की तरह थे। चरण सिंह को राम और खुद को हनुमान बताकर उन्होंने गलती की।
इंदिरा गांधी को मात देने वाले राजनारायण ने कहा कि जिस तरह रावण की गलत नीतियों का विरोध करते हुए विभीषण ने उसका विनाश किया था, उसी तरह वह भी बागपत से चरण सिंह को धूल चटा देंगे। चरण सिंह को लोकतंत्र का दुश्मन बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को मतदान ही नहीं करने दिया जाता।
राजनारायण ने प्रतिज्ञा की थी कि चरण सिंह को हराने के बाद वह गढ़ के गंगा तट पर अपनी दाढ़ी बनवाएंगे। चरण सिंह को लोकतंत्र और दलितों के सबसे बड़े दुश्मन की संज्ञा देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास उनका प्रचार करेंगे। हालांकि राजनारायण यह चुनाव जीत नहीं पाए और चौधरी चरण सिंह निर्वाचित हुए।
चुनाव चिह्न मिला था हाथी
राजनारायण को बागपत में चरण सिंह के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े होने पर हाथी चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। उन्हें कई पार्टियों का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर राजनारायण निराश हो गए।