'जॉनी तू मेरी चिंता मत करना, यहां सब ठीक है।' यही वो शब्द हैं, जो आगरा के वीर सपूत कौशल किशोर ने शहादत से एक दिन पहले अपने छोटे भाई कमल किशोर रावत उर्फ जॉनी से फोन पर कहे थे। लेकिन 24 घंटे बाद जब उन्हें अपने बड़े भाई के शहीद होने की सूचना मिली घोर अंधेरे के बीच खुले आसमान के नीचे घर के एक कोने बैठकर बार-बार इन्हीं शब्दों को दोहरा कर उन्हें याद कर रहे थे। आसमान की ओर देखते हुए भगवान से बस यही पूछ रहे थे, आखिर तुमने भाई को अपने पास इतनी जल्द क्यों बुला लिया।
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पुलवामा
- फोटो : self
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद होने वाले सीआरपीएफ जवानों में आगरा के कहरई गांव के कौशल किशोर रावत (48) भी शामिल हैं। वो सीआरपीएफ में नायक (एएसआई) के पद पर तैनात थे। वो 115 बटालियन में सिलिगुड़ी में नियुक्त थे। कुछ दिन पहले ही कश्मीर में 76 बटालियन में तैनाती हुई थी। इसमें ज्वाइन करने के लिए ही पहुंचे थे कि आतंकी हमला हो गया।
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शहीद कौशल किशोर
कमल किशोर की अपने बड़े भाई कौशल किशोर से बुधवार देर शाम को ही फोन पर बातचीत हुई थी। वो जम्मू-कश्मीर पहुंचने के बाद अपने छोटे भाई को वहां का हाल बता रहे थे। कमल किशोर ने जब चिंता व्यक्त की, तो अपने भाई को समझाते हुए कहा कि यहां सब ठीक है, तू मेरी चिंता मत कर। इसके बाद घर-परिवार की बात हुई।
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शहीद कौशल किशोर के पिता
कमल किशोर का कहना है कि बड़े भाई से काफी नजदीकियां थीं। आए दिन फोन पर बातचीत होती थी। न सिर्फ परिवार बल्कि खानदान के अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी लेते रहते थे। कमल किशोर बताते हैं, वह बहुत सहज हृदय थे। मगर, देशभक्ति उनमें बचपन से ही हिलोरे मारती रहती थी। अपने दोस्तों और परिजनों से सेना में भर्ती होने के लिए बातें करते रहते थे।
बातचीत के बीच कौशल किशोर के बचपन से जुड़ी यादों पर प्रकाश डालते-डालते कमल किशोर के आंसुओं का बांध टूट पड़ा। फिर तो बस उनके मुंह से बस यही निकल रहा था...'भईया तुम कहां चले गए। अब तुमसे कैसे बात होगी। अपनी मुश्किलों का मैं किससे हल पूछूंगा।' कौशल किशोर की शहादत पर परिजनों को गर्व है तो गुस्सा इस बात का है कि आखिर कब तक कायरना घटनाएं होती रहेगी और कब हमारी सरकार इन आतंकियों को सबक सिखाएगी।