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पद्मावतीः मथुरा में क्षत्रियों को मिला ब्राह्मणों का साथ, यूं जताया विरोध

Wed, 15 Nov 2017 07:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
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प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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फिल्म पद्मावती में रानी पद्मावती के चरित्र चित्रण को लेकर फिल्माए गए सीन पर अब मथुरा में क्षत्रिय राजपूतों के साथ अब ब्राह्मण महासभा भी आ गई है। संयुक्त रूप से फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली के प्रतीकात्मक स्वरूप को गधे पर बैठाकर सवारी निकाली और नारेबाजी की।
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मंगलवार सुबह अखिल भारतीय ब्रज मंडल क्षत्रिय राजपूत महासभा के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह सिकरवार के नेतृत्व में दर्जनों क्षत्रिय राजपूत युवक इकट्ठा हुए और फिल्म में फिल्माए गए सीन पर विरोध जताया। इस दौरान गधे पर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की प्रतीकात्मक सवारी निकाली। 

नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। फिल्म के प्रदर्शन को क्षत्रिय समाज का अपमान बताया। प्रदर्शन के दौरान ठाकुर दिवाकर सिंह, अनूप सिंह, चेतन सिकरवार, हिमांशु, विनय, सुमित, देवेंद्र सिकरवार, दिंगबर, ब्रजमोहन गौतम, पवन अग्रवाल, राजेंद्र सिंह जाईस सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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 साथ ही अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गिरिराज वशिष्ठ ने कहा कि पद्मावती फिल्म में हिंदू संस्कृति व नारी जाति का अपमान दिखाया जा रहा है जो गलत है। फिल्म निर्देशक विदेशी ताकतों के इशारे पर फिल्म बना रहे हैं। इससे अराजकता फैल रही है। 
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पद्मावती का चरित्र धूमिल किए जाने की निंदा

भक्ति प्रचारिणी सभा व ब्राह्मण महासभा की संयुक्त बैठक वृंदावन स्थित कैंप कार्यालय पर संपन्न हुई। अध्यक्षता करते हुए पं. रमेश चंद्र विधि शास्त्री ने कहा कि हमारे भारतीय इतिहास को पिछले कई दशकों से तोड़-मरोड़कर गलत दिशा देते हुए नई पीढ़ी के समक्ष रखा जा रहा है। कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से भी कुछ लोगों ने हमारी पीढ़ी को भ्रमित करने का कार्य किया है। 

पं. सुरेश चंद्र शर्मा ने कहा कि रानी पद्मावती के चरित्र को भी इतिहास के पन्नों पर धूमिल करने का प्रयास किया गया। ब्राह्मण समाज इस कुंठित प्रयास की निंदा करता है। जगदीश नीलम एवं मनीष भारद्वाज ने कहा कि मुगल शासकों की महानता को दर्शाने का काम तो हुआ लेकिन उनके शासन काल में भारतीयों पर हुए अत्याचारों को कभी किसी ने इतिहास में दर्शाने का काम नहीं किया।
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