अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का आगरा दौरा रद्द होने को वकीलों ने अपनी जीत मानते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति के नेतृत्व में विजय जुलूस निकाला। गत 17 जनवरी को हुई महापंचायत में समिति ने ओबामा को ताजमहल देखने से रोकने और इसके लिए ताज को घेर लेने का एलान किया था।
वकीलों का जुलूस मंगलवार दोपहर लगभग एक बजे कमिश्नरी बार से निकला। रास्ते में खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर नारेबाजी होती रही। जुलूस को पुरानी मंडी चौराहे तक जुलूस शांतिपूर्वक पहुंचा। यहां से वकीलों ने जब ताज दक्षिणी गेट की ओर बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया। यहां उन्हें रोकने के लिए बेरिकेडिंग की गई थी और भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। वकील कुछ देर तक नारेबाजी और आगे जाने की जद्दोजहद करते रहे लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। बाद में यहीं प्रदर्शन कर जुलूस समाप्त कर अधिवक्ता वापस लौट गए। जुलूस में संघर्ष समिति के संयोजक केडी शर्मा, सचिव अरुण सोलंकी, दरवेश यादव, सुरेंद्र लाखन, अविनाश शर्मा, ललित मोहन, भवतोष चक्रवर्ती, अरविंद दुबे ओमवीर चौहान और शिवशक्ति महिला मंडल की अध्यक्ष उर्मिला भारद्वाज, महासचिव मृदुला गुप्ता आदि मौजूद रहे।
संघर्ष समिति का मानना है कि ओबामा का दौरा इसलिए रद हुआ कि आगरा में खंडपीठ आंदोलनकारियों ने उन्हें ताज न देखने देने का ऐलान किया था। रणनीतिक तौर पर यह उनकी विजय है। इसी के चलते उन्होंने पूर्व निर्धारित घेराव कार्यक्रम को विजय जुलूस में तब्दील कर दिया था। हालांकि व्हाइट हाउस से जारी अधिकृत बयान के मुताबिक शाह के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए सऊदी अरब जाने की जरूरत के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति की आगरा यात्रा निरस्त की गई।
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फीका रहा प्रदर्शन
आगरा। ताज के समीप खंडपीठ स्थापना की मांग कर रहे वकीलों का प्रदर्शन फीका रहा। दीवानी से संचालित होने वाले आंदोलन में उसी परिसर के बहुसंख्य वकील नहीं पहुंचे। छावनी क्षेत्र के विधायक वहां से गुजरे लेकिन रुकना मुनासिब न समझा। अलग अलग जत्थों में मार्च हुआ। कइयों की कोशिश मीडिया के फोटो फ्रेम में आने की रही।
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प्रदर्शनकारियों से ज्यादा सुरक्षाकर्मी
विजय जुलूस में प्रदर्शनकारियों से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। एक वकील का ही कहना रहा कि सबसे ज्यादा सुरक्षाकर्मी, फिर मीडिया, इसके बाद वकील।
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मैच फिक्स करना चाहती थी पुलिस
एक पुलिस अधिकारी ने संघर्ष समिति के एक पदाधिकारी के सामने प्रस्ताव रखा कि कमिश्नरी का गेट बंद करवा देते हैं। अंदर से आप धक्का देना, बाहर से हम। फोटो हो जाएगी। प्रदर्शन यही खत्म कर दें। वकील साहब कुछ सहमत दिखे, लेकिन बात नहीं बनी। फिलहाल, बाद में ऐसा लगा कि जो कमिश्नरी गेट पर होना था, वही पुरानी मंडी चौराहे पर हुआ।