आगरा कॉलेज बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य सुभाष ढल ने आगरा काॅलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराने के लिए अदालत में दिए प्रार्थनापत्र दिया था। सुनवाई के बाद सीजेएम अचल प्रताप सिंह ने मुकदमा दर्ज कर थानाध्यक्ष लोहामंडी को विवेचना के आदेश दिए हैं।
ढल ने प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया था कि आगरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ला ने आयोग को फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र एवं अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर प्राचार्य का पदभार ग्रहण किया है। वह इस पद के योग्य उम्मीदवार नहीं हैं। उत्तर प्रदेश शासन को उनके पद के बारे में की गई शिकायत पर जांच हुई। 10 फरवरी 2024 को शासन ने आगरा काॅलेज प्रबंध समिति को अवगत कराया गथा कि काॅलेज प्राचार्य की ओर से पद पाने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग किया गया है। कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपयों की वित्तीय अनियमितताएं की गईं। सुनियोजित साजिश के तहत कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन का लाभ लिया। जिसके वह पात्र नहीं हैं।
सीजेएम ने 18 जुलाई 2024 को आंबेडकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को जांच आख्या देने के लिए निर्देशित किया था। मगर रजिस्ट्रार की जांच आख्या में सीजेएम ने पाया कि विपक्षी के प्रमाणपत्र फर्जी हैं या नहीं, इस बारे में स्पष्टता नहीं है। कहा कि कुलसचिव उसकी जांच नहीं कर सकते हैं। इस पर सीजेएम ने थानाध्यक्ष लोहामंडी को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।
जांच में करेंगे सहयोग
आगरा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनुराग शुक्ला ने बताया कि अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। फिर भी जो भी जांच होगी, उसमें पूर्ण सहयोग किया जाएगा।