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यूपी: 100 साल बाद निजीकरण की राह पर बिजली, दक्षिणांचल और पूर्वांचल से होगी शुरुआत; आगरा में रखी गई थी नींव

Thu, 28 Nov 2024 11:36 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा

सार

वर्ष 1923 में आगरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने जारी किया था बिजली कनेक्शन। अब दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पीपीपी मॉडल पर निजीकरण का प्रस्ताव। 1933 में मार्टिन बर्न ने लगाया था बिजलीघर। वितरण की पूरी व्यवस्था निजी हाथों में थी।
 
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मार्टिन बर्न कंपनी का आगरा किला के सामने लगाया गया बिजलीघर, - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सौ साल बाद वक्त का पहिया फिर से घूमा है। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के पीपीपी मॉडल पर निजीकरण का प्रस्ताव है। ठीक 100 साल पहले आगरा में बिजली की वितरण व्यवस्था निजी हाथों में ही थी और आगरा किला के पास बिजलीघर भी निजी कंपनी मार्टिन बर्न ने बनाया था। तब बिजली उत्पादन से लेकर वितरण तक सब निजी कंपनी के पास था। अब फिर से वही मॉडल अपनाने की तैयारी है।
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आगरा में वर्ष 1923 में आगरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने सबसे पहले बिजली का कनेक्शन दिया। दयालबाग में पोइयाघाट के मंदिर के पास खंभा लगाया गया था, जहां से दयालबाग को सबसे पहले रोशनी दी गई। घरेलू बिजली का पहला कनेक्शन आगरा के पांच बार सांसद रहे सेठ अचल सिंह के नाम पर था। वहीं, एमजी रोड पर बिजली की रोशनी से जगमगाने वाला पहला सार्वजनिक स्थल आगरा काॅलेज का हाॅस्टल बना था।

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वितरण के साथ उत्पादन भी निजी हाथों में
आगरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने 1923 में वितरण व्यवस्था संभाली तो 10 साल बाद 1933 में मार्टिन बर्न कंपनी ने आगरा फोर्ट के पास 0.5 मेगावाट बिजली उत्पादन का बिजलीघर लगाया, जिसकी बाद में क्षमता बढ़ते बढ़ते 29.75 मेगावाट हो गई। मांग बढ़ी तो मार्टिन बर्न कंपनी ने यमुनापार ईस्ट बैंक पावर हाउस बनाया गया। बाद में ताजमहल पर प्रदूषण मामले में दोनों बिजलीघर बंद कर दिए गए। अब दोनों के ही निशान नहीं हैं।

18 दिसंबर 1973 में सरकारी हुई वितरण व्यवस्था
51 साल पहले निजी कंपनी आगरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने बिजली आपूर्ति की पूरी व्यवस्था उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद को सौंप दी। तब 51 हजार उपभोक्ताओं पर बिजली के कनेक्शन थे। अब केवल शहर में ही 5 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं। बिजली नेटवर्क को वर्ष 2010 में फिर से निजी हाथों में सौंप दिया गया। आगरा शहर की बिजली वितरण व्यवस्था टोरंट पावर के हाथ आ गई।

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ओडिशा का मॉडल अपनाने की तैयारी
प्रदेश में घाटे में चल रहे विद्युत वितरण निगमों में डीवीवीएनएल और पीवीवीएनएल को सबसे पहले पीपीपी मॉडल पर लाया जाएगा। इसके लिए ओडिशा में टाटा पावर के हाथ दी गई वितरण व्यवस्था का मॉडल अपनाने की तैयारी है। ओडिशा में राज्य सरकार के साथ मिलकर निजी कंपनी बनाई गई है। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम 21 जिलों में है और केवल आगरा शहर की आपूर्ति निजी हाथों में हैं। अन्य शहरों में निगम ही वितरण कर रहा है।

अभियंता संघ ने किया विरोध
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने निजीकरण का विरोध किया है। बुधवार को महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि 6 अक्तूबर 2020 को तत्कालीन ऊर्जा मंत्री सुरेश खन्ना ने लिखित समझौते किया था, लेकिन अब सुधार की जगह निजीकरण किया जा रहा है। समझौते में लिखा था कि इंजीनियरों को विश्वास में लिए बिना ही किसी भी शहर में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा, पर अब उल्लंघन किया जा रहा है। अभियंता संघ इस मामले में निर्णायक आंदोलन चलाकर विरोध करेगा।
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