वितरण के साथ उत्पादन भी निजी हाथों में
आगरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने 1923 में वितरण व्यवस्था संभाली तो 10 साल बाद 1933 में मार्टिन बर्न कंपनी ने आगरा फोर्ट के पास 0.5 मेगावाट बिजली उत्पादन का बिजलीघर लगाया, जिसकी बाद में क्षमता बढ़ते बढ़ते 29.75 मेगावाट हो गई। मांग बढ़ी तो मार्टिन बर्न कंपनी ने यमुनापार ईस्ट बैंक पावर हाउस बनाया गया। बाद में ताजमहल पर प्रदूषण मामले में दोनों बिजलीघर बंद कर दिए गए। अब दोनों के ही निशान नहीं हैं।
18 दिसंबर 1973 में सरकारी हुई वितरण व्यवस्था
51 साल पहले निजी कंपनी आगरा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने बिजली आपूर्ति की पूरी व्यवस्था उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद को सौंप दी। तब 51 हजार उपभोक्ताओं पर बिजली के कनेक्शन थे। अब केवल शहर में ही 5 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं। बिजली नेटवर्क को वर्ष 2010 में फिर से निजी हाथों में सौंप दिया गया। आगरा शहर की बिजली वितरण व्यवस्था टोरंट पावर के हाथ आ गई।
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