शहर के बीचोंबीच आवास विकास परिषद की कई एकड़ जमीन। पांच साल पहले इस पर कब्जा लेने की कोशिश में तूफान उठा था। अब शांति है, पर तूफान से पहले वाली नहीं। दरअसल, सोने के भाव वाली इस जमीन को कौड़ियों के मोल हथियाने की कोशिश की शांति है। सौदागर दो बिल्डर हैं, लेकिन उनके सिर पर हाथ एक ‘माननीय’ का है। सत्ता प्रतिष्ठान की दखल से आवास विकास यह भूखंड लुटाने को तैयार है। यहां से लेकर राजधानी तक बिसात बिछ चुकी है। बस, देर वह इंतजाम होने की है कि गुपचुप यह जमीन चहेते सौदागरों की झोली में डाल दी जाए और कोई दाग भी न लगे। यानी कोयले की दलाली कर लें और हाथ भी काले न हों।
याद दिला दें, करकुंज चौराहा के पास कुल 36 एकड़ जमीन है जिस पर अरसे से कब्जा गुरुद्वारा गुरु का ताल कमेटी का है। इसमें 11 एकड़ जमीन आवास विकास परिषद अपनी सिकंदरा आवासीय योजना का हिस्सा बताती है। यह पुराना विवाद 23 दिसंबर 2010 को तब भारी बवाल में बदल गया जब आवास विकास ने प्रशासन की मदद से इस पर कब्जा लेने की कोशिश की। भड़की सिख संगत और कब्जा लेने आई टीम के बीच टकराव में संगत भारी पड़ी और टीम को लौटना पड़ा। तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने थाना सिकंदरा में गुरुद्वारा के प्रीतम सिंह सरदार, रविंद्रपाल टिम्मा, भारत नगर सहकारी समिति तथा 150-160 अज्ञात लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसे भी लेकर कई दिन तक भारी आक्रोश रहा। अंतत: लगभग दो साल बाद 25 मई 2012 को इस मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी।
इसके बाद गुरुद्वारा कमेटी का रुख नरम पड़ा तो अब यही जमीन दो बिल्डरों को देने की तैयारी शुरू हो गई। इधर सत्ता के इशारे पर राजधानी में बैठे अफसर दोनों बिल्डर का सौदा कराने में जुट गए। शासनस्तर से जो कुछ पेच रह गया है, उसका भी तोड़ वही तलाश रहे हैं। यही वजह है कि कभी इसी जमीन के लिए बड़ा बवाल मोल लेने वाले आवास विकास के स्थानीय अधिकारी मुंह सिए बैठे हैं। इस बारे में वह आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने को तैयार नहीं। जो भी हो, पर डर सबको यही है कि बात खुली तो जमीन कौड़ियों में लुटाने के अरमानों पर पानी न फिर जाए। सही भी है, आवास विकास को नियमानुसार बिक्री करनी पड़ी तो मुनाफे की इस बरसात में भीगने से बहुतेरे वंचित रह जाएंगे।
मामला फिर से कोर्ट में
2010 में हुए विवाद के बाद से आवास विकास परिषद के अधिकारी फिर से परिषद की जमीन पर कब्जा लेने नहीं पहुंचे। दरअसल, इस विवाद के बाद मामला फिर से कोर्ट में पहुंच गया था। जो अब भी विचाराधीन है। मामले में तत्कालीन आरोपियों में से एक रहे रविंद्रपाल सिंह टिम्मा का कहना है कि यह समाज की जमीन है। इस पर किसी का कब्जा नहीं होने देंगे। जबकि गुरुद्वारा गुरु का ताल कमेटी के संत बाबा प्रीतम सिंह का बस इतना ही कहना है कि ‘अब उस जमीन को लेकर हमारा किसी से कोई विवाद नहीं है।’
एडीए की जमीन का हो चुका है ‘खेल’
संजय प्लेस में ऐसे ही एक जमीन को कौड़ियों के भाव ठिकाने लगाया जा चुका है। लेकिन यह जमीन आवास विकास परिषद की नहीं आगरा विकास प्राधिकरण की थी। एक माननीय ने भूमिका निभाई। बकायदा नीलामी की रस्म अदा की गई और चेहते बिल्डर को भूखंड दे दिया गया। अब इस पर जल्द ही प्रोजेक्ट लांच होने वाला है।