बाह। भदावर क्षेत्र के गांवों में होली गायन की महफिलें अभी भी जम रही हैं। होली गायन में चेचक से आलू के दागी होने एवं मंडी में मंदी होने का किसानों का दर्द छलक रहा है।
बाह के अहिवरन सिंह परिहार, सिमराई के नेपाल सिंह गुर्जर ने ''''आलू पै चेचक की पड़ गई मार, भइया कैसो आयौ होली को त्योहार, आलू की खाल भई खुरदरी यार, चेचक ने कर दियो सब बेकार'''' गीत के जरिए चेचक से आलू में हुए नुकसान की पीड़ा बयां की। क्वारी के सर्वदमन सिंह, जैतपुर के कुलदीप भदौरिया ने ''''आलू में चेचक के दाग देखि पछताय, होरी कैसे खेले किसान रंग लगाय'''' आलू एवं किसानोंं की दुर्दशा को शब्द दिए। जरार के जोधाराम और राजवीर सिंह ने ''''बाजार में भाव मिले न अबके, मेहनत पे फिर गयो पानी....'''' होली गीत के जरिए किसानों की बेबसी की तस्वीर पेश की। जैतपुर, जरार, चांगौली, क्वारी, पुरा कनैरा, हरलालपुरा, बाघराजपुरा, बिजौली की होली की महफिलों में रंग जरूर उड़ा, लेकिन किसानों की बेरंग हुई होली का मुद्दा छाया रहा।