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मैनपुरी में आलू की फसल हुई तैयार, बाजार में नहीं मिल रहा भाव

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मैनपुरी। आलू की फसल तैयार हो गई है। जिले में किसान आलू की खोदाई में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर किसानों को मंडी में आलू का उतना भाव नहीं मिल रहा है जितनी वह उम्मीद किए हुए थे। स्थिति यह है कि वर्तमान में आलू की कीमत मंडी में पांच से सात रुपये किलो है। यानी आलू पांच सौ से सात रुपये क्विंटल बिक रहा है। बीते दो साल की तुलना में फरवरी में आलू का यह भाव काफी कम है। वर्ष 2020 में आलू ने किसानों को काफी फायदा दिया था।
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जिले में आलू 45 रुपये किलो तक बिका। भाव अच्छा मिला तो जिले में किसानों ने बढ़ चढ़कर इसका उत्पादन किया। इससे जिले में करीब दो हजार हेक्टेयर आलू का रकबा बढ़ गया। अब खोदाई शुरू हो गई है। मंडी में बढ़ी संख्या में आवक शुरू हो गई है। वर्तमान में आलू पांच सौ से सात सौ रुपये किलो बिक रहा है। वर्ष 2020 में फरवरी में आलू का भाव आठ सौ से 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल था। इस वर्ष मार्च में भाव 12 सौ से 15 सौ रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया था। वर्ष 2019 में फरवरी में आलू सात सौ से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल बिका था।
बंपर पैदावार है कम भाव का कारण
भाव कम होने के पीछे किसान और व्यापारी आलू की बंपर पैदावार मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिले के साथ ही आसपास के जनपदों में रकबा बढ़ा है। इसके साथ ही इस वर्ष रोग कम लगा है, इससे प्रति बीघा उत्पादन भी अधिक हुआ है। यही कारण है कि मंडी में आलू की आवक बढ़ी है। जिले में बीते वर्षों में एक बीघा में औसतन 20 से 25 क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। इस वर्ष रोग न लगने और मौसम के साथ देने के कारण प्रति बीघा में 25 से 35 क्विंटल पैदावर हुआ है।
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न्यूनतम समर्थन मूल्य हो निर्धारित
फरवरी में इस वर्ष आलू का भाव कम होने से किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने कई बार आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की बात कही, लेकिन व्यवस्था आलू नहीं हुई।
बोले किसान
फिलहाल मंडी में आलू का उम्मीद के हिसाब से भाव नहीं मिल रहा है। अभी पांच सौ से सात सौ रुपये क्विंटल आलू बिक रहा है। जो बीते दो वर्षों की तुलना में कम है।
-भारत सिंह
इस साल आलू का रकबा बढ़ा है। वहीं रोग न लगने की वजह से पैदावार भी अच्छी हुई है। इसी के चलते इस वर्ष आलू की आवक मंडी में अधिक है।
-विकास सिंह
बीते दो वर्ष की तुलना में अभी आलू का भाव कम है। अगर स्थिति यही रही तो किसान को नुकसान होगा। सरकार को आलू बाहर भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए।
-श्रीकृष्ण सिंह
आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होना चाहिए। कई वर्षों से किसान यह मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
-भागीरथ
वर्जन
मैनपुरी सहित आसपास के जिले में आलू का रकबा बढ़ा है। वहीं पैदावार भी अच्छी हुई है। इसी के चलते वर्तमान में मंडी में आलू की आवक अधिक है। इसी के कारण ही भाव में गिरावट आई है।
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पियूष चंदेल, आलू व्यापारी
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