मैनपुरी। डाकघर में आधार कार्ड बनवाने के लिए अब छह महीने इंतजार करना पड़ेगा। यहां अप्रैल 2021 तक के टोकन वितरित किए जा चुके हैं। कोरोना काल में सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए डाकघर में टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। लेकिन यहां दिन-प्रतिदिन भीड़ बड़ती ही जा रही है।
शासन ने आधार पंजीकरण में फर्जीवाड़ा सामने आने पर निजी केंद्रों को बंद कर दिया था। इसके बाद डाकघर और बैंकों में आधार पंजीकरण और संशोधन का काम शुरू कराया गया। बैंकों में कर्मचारी कम होने की बात कहकर आधार पंजीकरण काउंटर अपने अनुसार संचालित किया जाता है, वहीं डाकघर में ये स्थाई रूप से संचालित हो रहा है।
इसे देखते हुए डाकघर में सर्वाधिक लोग पहुंचते हैं। लेकिन अब आधार संशोधित कराने या नया बनवाने के लिए छह महीने का इंतजार करना होगा। डाक विभाग अप्रैल 2021 तक के टोकन का वितरण कर चुका है। इसके बाद टोकन वितरण बंद कर दिया गया है।
पहले आधी रात से लगती थी लाइन
आधार बनवाने में लोगों को परेशानी से बचाने के लिए टोकन की व्यवस्था लागू की गई थी। दरअसल पहले बिना टोकन के जब आधार बनते थे तो डाकघर में आधी रात से ही लाइन लगना शुरू हो जाती थी। कुछ लोग तो शाम को डाकघर परिसर में ही रात काटते थे। इसी को देखते हुए टोकन की व्यवस्था लागू की गई थी।
इनमें हैं आधार की विशेष आवश्यकता
राशनकार्ड, आयकर विवरणी, छात्रवृत्ति आवेदन, विद्यालय में प्रवेश के लिए, आवास योजना, पेंशन योजना
लोगों की बात
कई बार आधार संशोधित कराने के लिए डाकघर और बैंकों के चक्कर लगाए। एक माह पहले टोकन मिला था। इसके बाद आज आई हूं। पता नहीं आज आधार बन पाएगा या नहीं।
रूबी, किला बजरिया।
किसान सम्मान निधि के लिए आधार कार्ड में संशोधन कराना है। काफी परेशान होने के बाद आज आखिरकार नंबर आ गया। लोगों की परेशानी पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
अशोक कुमार, मंछना।
सरकार ने जब निजी आधार पंजीकरण केंद्र बंद किए थे तो अधिक से अधिक केंद्र शुरू कराए जाने थे। जो केंद्र संचालित भी हैं, उन पर भी लापरवाही की जा रही है।
अर्चना कुमारी, चौथियाना।
योजनाओं में आधार की अनिवार्यता को समाप्त कर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जा सकता है तो इसमें सुधार के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
सर्वेश कुमार, गाड़ीवान
जिले में 15 स्थानों पर आधार पंजीकरण और संशोधन के आदेश जारी किए गए हैं। इसके बाद भी अगर समस्या आ रही है तो जानकारी की जाएगी। जो भी उचित होगा किया जाएगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।