मैनपुरी। जिला अस्पताल में आए दिन कोई न कोई समस्या खड़ी हो जाती है। इस बार घटिया इंट्राकेट मरीजों और स्टाफ दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। मरीजों को लगाने के बाद इंट्राकेट लीक हो जाती है, जिससे खून बहने लगता है। इससे मरीजों को भी परेशानी होती है और स्टाफ को भी मरीजों का आक्रोश झेलना पड़ता है।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पताल उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं। इसमें बुखार और डायरिया के मरीजों को अनिवार्य रूप से इंट्राकेट लगाई जाती है। इसके माध्यम से इंजेक्शन व डि्रप लगाने में आसानी रहती है, लेकिन इमरजेंसी वार्ड में उपलब्ध कराई गई इंट्राकेट इस बार घटिया दर्जे की है। मरीजों को लगाने के बाद ये इंट्राकेट लीक हो जाती हैं। इससे या तो मरीज का खून बहने लगता है या फिर डि्रप या इंजेक्शन बर्बाद हो जाता है। इसके कारण मरीजों को बजाए उपचार के उल्टा तकलीफ ही मिलती है।
वहीं स्टाफ को भी मरीजों के दबाव में दोबारा इंट्राकेट डालने में अतिरिक्त समय देना पड़ता है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाएं भी बिगड़ती हैं।
तीमारदारों से विवाद के कारण स्टाफ रहता है परेशान
अस्पताल प्रशासन ने भले ही घटिया इंट्राकेट मंगाई हैं, लेकिन स्टाफ को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। दरअसल इंट्राकेट लीक होने पर तीमारदार स्टाफ के साथ विवाद करते हैं। उनका आरोप रहता है कि स्टाफ द्वारा इंट्राकेट लगाने में लापरवाही बरती गई। जब स्टाफ इसका विरोध करता है तो विवाद खड़ा हो जाता है।
इंट्राकेट लीक होने के संबंध में जानकारी की जाएगी। अगर कहीं कोई गड़बड़ी है तो उसे बदलवाया जाएगा। -डॉ. मदनलाल, सीएमएस