धूल और धुएं से ताजनगरी की हवा प्रदूषित हो रही है। कमला नगर, खंदारी, शाहगंज, आवास विकास, शास्त्रीपुरम में जहां खुदाई हो रही हैं, वहां छिड़काव नहीं हो रहा। जहां धूल नहीं, वहां सड़कों की टैंकरों से धुलाई हो रही है। इस काम में लगे डीजल चालित टैंकर धुआं फैला रहे हैं। लापरवाही और पर्यावरण क्षति पर मेट्रो, जल निगम, एनएचएआई, छावनी परिषद और रेलवे पर जुर्माना लगने के बाद भी न धूल रुक रही है और न प्रदूषण फैलाना। यह हालात तब हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल के 60 किमी के दायरे को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील घोषित कर रखा है।
शहर में 50 से अधिक स्थानों पर सीवर और गंगाजल के लिए बेतरतीब खुदाई हो रही है। कमला नगर में नाला व गंगाजल खुदाई से मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं, जिन पर पानी का छिड़काव नहीं हो रहा। यही स्थिति खंदारी स्थित विश्वविद्यालय कैंपस के गेट पर है। यहां भी मिट्टी के ढेर सूखे पड़े हैं। जिनसे धूल उड़ रही है। शाहगंज संगीता गली, रुई की मंडी पर भी खुदाई हो रही है। शास्त्रीपुरम में 30 से अधिक स्थानों पर गहरे गड्ढे खुदे पड़े हैं। सड़क पर मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। जिसका खामियाजा वहां से गुजरने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। प्रदूषण से उन्हें परेशानी हो रही है, फिर भी कार्यदायी संस्थाओं का गैर जिम्मेदार रवैया नहीं बदल रहा।
इन पर लगा जुर्माना
- नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) पर सड़क चौड़ीकरण में प्रदूषण फैलाने पर 6.84 करोड़ रुपये का जुर्माना लग चुका है।
- उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) पर निर्माण कार्य, कास्टिंग यार्ड से प्रदूषण फैलाने पर 29.25 लाख रुपये जुर्माना लगा।
- जल निगम की गंगाजल इकाई (नगरीय) पर शहर में खुदाई के दौरान धूल नियंत्रण नहीं करने पर 37.50 लाख रुपये का जुर्माना लगा है।
- छावनी परिषद पर सदर बाजार से नौलक्खा तक सीवर खुदाई से प्रदूषण फैलाने पर 1 नवंबर से प्रतिदिन 12500 रुपये जुर्माना लग रहा है।
- उत्तर मध्य रेलवे के कुबेरपुर स्थित माल गोदाम में प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही पर 28 जुलाई से प्रतिदिन 25000 रुपये जुर्माना लग रहा है।