जमीन पर रहने वाले रवि व शंकरिया को पहले तत्कालीन एसओ जितेंद्र कुमार ने गांजा के मुकदमे में जेल भेजा। 9 अक्तूबर को आबकारी निरीक्षक त्रिभुवन सिंह ने छापा मारा। जिसमें पूनम और पुष्पा को जेल भेजा गया। जिसके बाद परिवार उजड़ गया और जमीन खाली हो गई।
एसओ जितेंद्र कुमार और बिल्डर कमल चौधरी पर दो मुकदमे दर्ज होने के बाद दोनों फरार हैं। एसआईटी मामले की जांच कर रही है। इधर, जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने आबकारी उपायुक्त से आबकारी निरीक्षक त्रिभुवन सिंह की जांच कराई। जिसमें आबकारी निरीक्षक और छापा मारने वाली टीम में शामिल प्रधान कांस्टेबल अजीत सिंह, राहुल कुमार, जितेंद्र कुमार, डौली कुमारी और रचना पाठक के विरुद्ध विस्तृत गहन जांच और कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीएम ने शासन को भेजी है। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी का कहना है कि प्राथमिक जांच में आबकारी निरीक्षक की भूमिका संदिग्ध मिली है।
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कहां से आई शराब और ढक्कन
मुकदमे की फर्द के मुताबिक आबकारी निरीक्षक ने पूनम, पुष्पा से 999 फाइन व्हिस्की चढ़ीगढ़ मार्का कुल 51 बोतल, फाइटर ब्रांड के 180 देशी पव्वा, प्लास्टिक कैन में छह लीटर बनी शराब और राॅयल स्टेग, मैकडॉबल ब्रांड के 350 ढक्कन बरामद दिखाए थे। यदि मुकदमे फर्जी हैं तो फिर आबकारी निरीक्षक के पास शराब और ढक्कन कहां से आए।
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