थाना प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार के मुताबिक, आरोपी हरिओम ने पूछताछ में बताया कि उसने जाति, मूल निवास, चरित्र और अविवाहित प्रमाणपत्र जसवंत नगर तहसील की जगह तहसील इटावा से बनवाए थे। सेना के ही नायक शैलेंद्र कुमार के भाई इटावा के थाना सिविल लाइंस के मोहल्ला रणवीर नगर निवासी विवेक से संपर्क किया था। उसे ढाई लाख रुपये सात नवंबर, 2019 को दिए थे। उसने कहा था कि प्रमाणपत्रों का सत्यापन करा देगा। पुलिस विवेक की तलाश कर रही है।
1500 रुपये में बनवाए प्रमाण पत्र
आरोपी हरकेश ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वो बुलंदशहर में खुर्जा तहसील का रहने वाला है, जबकि जाति, निवास, चरित्र और अविवाहित का प्रमाणपत्र भरथना तहसील से बनवाए थे। इसके लिए गौतमबुद्ध नगर के जेवर के रहने वाले सुमित ने 1500 रुपये लिए थे। आधार कार्ड को पंजाब नेशनल बैंक में बदलवाया था। इसके लिए मूल निवास प्रमाणपत्र की प्रति दी थी।
बैंक में प्रमाणपत्र लगवाकर बदलवाया पता
पुलिस की पूछताछ में आदेश कुमार ने बताया कि उसने अपने प्रमाणपत्र 3500 रुपये देकर बुलंदशहर के गांव सैदपुर निवासी सचिन से बनवाए थे। ये एटा तहसील के थे। आधार कार्ड बदलवाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में प्रार्थनापत्र दिया था। इसके लिए फर्जी पते पर बने निवास प्रमाणपत्र को लगाया। पता राम नगर, रुस्तमगढ़, एटा करवा लिया था।
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों की मदद से सेना में भर्ती कराने का ठेका लेने वाले गैंग के सरगना राकेश चौधरी के पकड़े जाने के बाद सैन्य भर्ती बोर्ड के अधिकारियों से जानकारी साझा की गई थी। इसमें हाल में हुई भर्ती के अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापित करने के लिए कहा था।
भर्ती अधिकारियों ने 12 के दस्तावेज संदिग्ध पाए। क्योंकि अभ्यर्थी ऐसे थे, जिन्होंने पढ़ाई के जो दस्तावेज लगाए थे, वो निवास प्रमाणपत्र से अलग जिले के थे। इससे शक हो गया। नौ और अभ्यर्थियों को नियुक्ति पर आना है। उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
प्रतिस्पर्धा कम होने का उठा रहे थे फायदा
अभ्यर्थियों ने पूछताछ में बताया कि इटावा की भर्ती में प्रतिस्पर्धा कम थी। यहां अभ्यर्थी कम आते हैं। इसलिए यहां से भर्ती होने का फैसला लिया था। दस्तावेज भी फर्जी बनवा लिए थे। मगर, यह नहीं पता था कि नियुक्ति के दौरान पकड़े जाएंगे।
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