फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: जिस बेशकीमती जमीन के लिए पुलिस ने बेगुनाह परिवार को भेजा था जेल, उसमें बिल्डर समेत नौ को क्लीनचिट

Mon, 21 Apr 2025 07:33 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

बोदला जमीन कांड में बिल्डर समेत नौ को क्लीनचिट मिल गई है। बेशकीमती जमीन पर कब्जे के लिए पुलिस ने बेगुनाह परिवार को जेल भेज दिया था। मामले में सीआईडी जांच कर रही है। 
विज्ञापन
बोदला जमीन प्रकरण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा के बोदला के चर्चित जमीन कांड में एक बार फिर पुलिस फंस गई है। प्रकरण की जांच में सीआईडी (अपराध शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग) ने चार नए मुकदमे लिखाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही बिल्डर कमल चौधरी सहित नौ लोगों को क्लीनचिट दे दी है। मुकदमे में थाना जगदीशपुरा के प्रभारी निरीक्षक आनंदवीर सिंह और सरदार टहल सिंह फंसेेंगे।
विज्ञापन


डीआईजी सीआईडी अखिलेश कुमार निम ने सीआईडी की विवेचना की अंतिम प्रगति आख्या से संबंधित पत्र विशेष सचिव गृह (पुलिस) को भेजा है। इसकी एक प्रति कमिश्नरेट आगरा को भेजी गई है। विवेचना की अंतिम प्रगति आख्या पर मुहर शासन से लगनी है। सीआईडी ने माना है कि उमा देवी पुलिस की जांच में फर्जी साबित हुईं। उन्होंने जमीन पर कब्जे का केस दर्ज कराया था।

ये भी पढ़ें -  Agra News: बंगारा में जातीय तनाव, फायरिंग से फैली दहशत; गांव में भारी संख्या में पुलिस तैनात
विज्ञापन


 
Trending Videos


एसआईटी की जांच में टहल सिंह के बेटे की बहू नहीं निकली। उसका वारिसान फर्जी था। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाए गए थे। ऐसे में पुलिस ने कब्जे और डकैती की धारा के तहत कार्रवाई किस आधार पर कर दी। यह सवाल उठता है। जमीन कांड में तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार को जेल जाना पड़ा था। कमिश्नरेट में विवेचना के लिए एसआईटी का गठन किया था। मुकदमे की विवेचना इंस्पेक्टर जगदीशपुरा आनंदवीर सिंह ने एसआईटी के निर्देशन में की थी। सीआईडी ने एसआईटी में शामिल अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।

पुलिस आयुक्त पर गिरी थी गाज
जगदीशपुरा में बैनारा फैक्टरी के पास करोड़ों की जमीन पर कब्जा किया गया था। इस जमीन पर केयरटेकर के रूप में रहने वाले रवि कुशवाहा, संकरिया और ओमप्रकाश को अगस्त 2023 में गांजा बेचने के आरोप में जेल भेजा गया था। अक्तूबर 2023 में आबकारी विभाग के साथ मिलकर जमीन पर तस्करी की शराब की ब्रिकी दिखाई गई थी। रवि कुशवाह की पत्नी पूनम और बहन पुष्पा को जेल भेजा गया था। पूरे परिवार के जेल जाने के बाद दीवार बनाकर कब्जा किया गया था।

 

मामला 2024 में सामने आया। जब लखनऊ तक शिकायत पहुंची। मामले में उमा देवी ने डकैती और कब्जे की धारा में केस दर्ज कराया। पुलिस आयुक्त डाॅ. प्रीतिंदर सिंह का तबादला किया गया था। पुलिस ने एक-एक करके कई आरोपियों को जेल भेजा। इसमें बिल्डर कमल चाैधरी मुख्य आरोपी थे। मामले में एसआईटी ने जांच की थी। इसमें पाया कि उमा देवी खुद फर्जी है। पुलिस ने उमा देवी सहित पांच लोगों को जेल भेजा था।

ऐसे दर्ज होंगे मुकदमे
जिस टहल सिंह को उमा देवी ने मृत दशार्या था वह जिंदा रूप में सामने आया। सीआईडी ने लुधियाना निवासी टहल सिंह के खिलाफ केस दर्ज करने की संस्तुति की। आरोप है कि उन्होंने डीड के तहत जमीन को पदम चंद जैन को दे दिया था। अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए कई लोगों को जमीन का बैनामा/एग्रीमेंट/पॉवर ऑफ अटार्नी कर दी। सीआईडी ने जांच में माना कि विवेचना के दौरान गलत आरोपपत्र प्रेषित किया था।

ये भी पढ़ें -  यमुना एक्सप्रेसवे पर दर्दनाक हादसा: बस ने दो युवकों को कुचला, 50 मीटर तक घसीटी बाइक... दृश्य देख कांप गए लोग


 

इस पर जमीन कांड की विवेचना करने वाले इंस्पेक्टर आनंदवीर सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 199 व 225 के तहत केस लिखने की संस्तुति की गई है। किशन मुरारी, रवि कुशवाह, सह अभियुक्त राजू एवं बंटू के खिलाफ भी धोखाधड़ी की धारा में केस लिखा जाए। आरोप है कि उन्होंने 27 जनवरी 2020 को उप निबंधक सदर पंचम के यहां मुख्तारनामा रजिस्टर्ड कराया। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने पर एक केस अजय कुमार सफाई नायक नगर निगम लोहामंडी जोन, परमानंद तत्कालीन सफाई खाद्य निरीक्षक हाल मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षक नगर निगम सहारनपुर के खिलाफ लिखाने की संस्तुति की है।

 
विज्ञापन

इनको दी क्लीनचिट
बिल्डर कमल चौधरी, उनके बेटे धीरू चौधरी, जितेंद्र कुमार, अमित अग्रवाल, पुरुषोत्तम पहलवान, नेम कुमार जैन, किशोर बघेल, भूपेंद्र पहलवान, आनंद जुरैल के नाम विवेचना से पृथक करने की संस्तुति की थी। पुलिस महानिदेशक अपराध शाखा अपराध अनुसंधान विभाग से पांच मार्च 2025 को उसे अनुमोदित किया जा चुका है। अपराध शाखा ने विवेचना के मध्य पाया कि स्थानीय पुलिस विवेचना में बिल्लू चौहान उर्फ सुरेंद्र चौहान एवं मुकेश अग्रवाल के नाम प्रकाश में लाए गए थे। विवेचना में इनके नाम भी पृथक करने की संस्तुति की है।

इन सवालों के सीआईडी जांच में जवाब नहीं
- फर्जी मुकदमे दर्ज करने के लिए गांजा और शराब कहां से आई थी?
- पुलिस ने जो सामान बरामद दिखाया था, वो कहां से आया था?
- जमीन पर कब्जा लेने के लिए आपराधिक साजिश किसने और क्यों रची थी?
- एसआईटी ने जांच की थी? किस आधार पर चार्जशीट लगाई गई?
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें