सदर बाजार के थाना प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि आईपीसी की 269 और 270 धाराएं ऐसे कृत्य पर लगाई जाती हैं जिनसे महामारी फैलने का खतरा हो। दोनों धाराओं में दोष सिद्ध होने पर दो दो साल कारावास का प्रावधान है।
इस मामले में पहले जांच की जाएगी। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई तय होगी। सात साल से कम की सजा का प्रावधान वाले मामलों में विशेष परिस्थितियों को छोड़कर गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है।
युवती का पति बंगलूरू में में निजी कंपनी में है और उसे कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। एक माह पहले हुई शादी के बाद दंपती इटली से हनीमून मनाकर लौटे थे। शादी के बाद पहली होली के लिए युवती आगरा आ गई थी। उसके आने के बाद पति के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना आई।
इस पर स्वास्थ्य विभाग ने 12 मार्च को उसका सैंपल लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की लैब में भेजा, इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालांकि इसके आधार पर प्रशासन ने कोरोना की पुष्टि नहीं की बल्कि एक और सैंपल किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज भिजवा दिया।
भर्ती कराने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी थी
इस बीच अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के आधार पर महिला को भर्ती कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके घर पहुंची थी। आरोप है कि पिता ने कह दिया कि वह बंगलुरू जाने के लिए घर से दो घंटे पहले चली गई। शक होने पर टीम ने रेलवे अफसरों से बात की। पुलिस को भी बुला लिया। तब जाकर युवती को भर्ती कराया जा सका।
कोरोना वायरस की संदिग्ध युवती को कोरोना वायरस की पुष्टि हो गई। यह आगरा का आठवां मामला है। इनमें से चार लोग स्वस्थ हो चुके हैं। इस युवती की हालत स्थिर बनी हुई है। एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में बने आइसोलेशन वार्ड में चिकित्सकीय टीम की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।