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Agra News: यक्ष एप से सत्यापन में पुलिस हुई फेल, जेल से छूटे हिस्ट्रीशीटर ने चलाईं गोलियां

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आगरा। यक्ष एप पर अपराधियों के सत्यापन का कार्य पुलिस कर रही है। कागजों में शत-प्रतिशत सत्यापन का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद जमानत पर जेल से छूटकर आए सिकंदरा के हिस्ट्रीशीटर जिम्मी चाैधरी ने चार दिन बाद ही दुकानदार पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। जान तो बच गई मगर पुलिस के सत्यापन और एप पर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं पुलिस का दावा है कि जेल चाैकी से सूचना के अभाव में एप में डाटा दर्ज नहीं किया जा सका।
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पुरानी मंडी स्थित श्यामलाल मार्ग पर अधिवक्ता संगीता राठाैर के भाई गाैरव राठौर पर गोली चलाई गई थी। वह अपनी परचून की दुकान पर बैठे थे। तभी हेलमेट पहनकर हमलावर आया और गोली मारकर भागने में सफल रहा। इस मामले में बुधवार रात को मुठभेड़ के बाद तीन आरोपी आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर 15 निवासी जिम्मी चाैधरी, ताजगंज निवासी सुनील राठौर और ककरैठा निवासी दिनेश शर्मा को गिरफ्तार किया गया।
जिम्मी चाैधरी थाना सिकंदरा का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ 24 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें लूट, हत्या की कोशिश सहित अन्य मामले शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि वर्ष 2023 में जिम्मी को एक मामले में 10 साल की सजा हुई थी। उसने हाईकोर्ट में अपील की। इस पर राहत मिल गई। वह समय पूर्व रिहा हो गया। 17 जून को जेल से बाहर आया था।
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एडीसीपी हिमांशु गाैरव ने बताया कि आरोपी सुनील राठाैर को अप्रैल में गैर जमानती वारंट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने उसे जेल भेजा था। वहां उसकी मुलाकात जिम्मी से हुई थी। वहीं पर रंजीत भी मिला था। सुनील अधिवक्ता से परेशान था। इसलिए उसने उसके भाई पर गोली चलाने के लिए जिम्मी और रंजीत से 1.50 लाख रुपये में साैदा किया था।
सुनील 35 दिन बाद जमानत पर छूटा। बाद में रंजीत बाहर आया। घटना से 4 दिन पहले जिम्मी जेल से बाहर आया। साजिश रचने के बाद वह अपने साथी सोनू के साथ बाइक से पहुंचा। उसने दुकानदार पर गोली चलाई और भाग गया। रंजीत और दिनेश स्कूटर पर दूर खड़े थे।

हिस्ट्रीशीटर पर नजर नहीं रख पाई सिकंदरा पुलिस
जिम्मी चाैधरी थाना सिकंदरा का हिस्ट्रीशीटर है। हिस्ट्रीशीटरों की जानकारी पुलिस के पास होती है। इनके थाने के बोर्ड पर नाम भी लिखे जाते हैं। घर जाकर पुलिस पूछताछ भी करती है। यह पता किया जाता है कि वो कहां पर रह रहा है। मगर जिम्मी चाैधरी जेल से बाहर आया तो पुलिस को पता क्यों नहीं चला? यह सवाल उठ रहा है। पुलिस ने सत्यापन किया होता तो वो शायद वारदात नहीं करता।
हमले में दुकानदार की जान भी जा सकती थी। यक्ष एप से भी पुलिस अपराधियों का सत्यापन कर रही है। जिन अपराधियों के पास बीट सिपाही पहुंच रहे हैं, उनके सत्यापन प्रक्रिया कोई माॅनिटरिंग हो रही है या नहीं? इस पर अधिकारियों का ध्यान नहीं है। एडीसीपी ने बताया जेल की तरफ से अपराधी के रिहा होने की जानकारी दी जाती है। मगर 17 और 18 जून को जेल चाैकी से कोई सूचना नहीं मिली। अगर सूचना मिलती तो सत्यापन किया जाता।

सूचना न भेजने की जानकारी नहीं
जेल से छूटने वाले अपराधियों की जानकारी हवालात प्रभारी की ओर से जेल चाैकी पर दी जाती है। इसके बाद जेल चाैकी से सूचना डीसीआरबी को भेजी जाती है। वहां से थाने को जानकारी दी जाती है। इस मामले को दिखवाया जाएगा। सूचना न भेजे जाने की जानकारी नहीं है। - हरिओम शर्मा, अधीक्षक, जिला जेल
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