जिला एवं सत्र न्यायालय के गेट नंबर एक पर परिसर में अंदर जाने वाले अधिवक्ताओं और वादकारियों की च
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आगरा। दीवानी में बृहस्पतिवार को अधिवक्ताओं के दो गुटों में मारपीट की घटना के बाद शुक्रवार को चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। एसएसएफ के जवानों ने बिना पहचानपत्र देखे अधिवक्ताओं को प्रवेश नहीं दिया। वादकारी की भी तलाशी ली गई। पुलिसकर्मी एनाउंस कर लोगों को बेवजह खड़ा होने के लिए मना करते रहे। वहीं चैंबरों को भी देखा गया। लाठी-डंडे रखे होने के बारे में जानकारी की गई।
दीवानी परिसर में बृ़हस्पतिवार को दो बार अधिवक्ताओं के दो गुट भिड़ गए थे। पहले करीब एक बजे और दूसरी बार शाम 4 बजे दीवानी परिसर को जंग का अखाड़ा बना दिया गया। दीवानी में एसएसएफ भी तैनात रहती है। इसके बावजूद घटना हुई थी। एक अधिवक्ता और किसान नेता का सिर फट गया था। सूचना पर पुलिस आयुक्त दीपक कुमार दीवानी पहुंच गए थे। पुलिस की चेकिंग में अधिवक्ताओं के चैंबर से लाठी-डंडे बरामद किए।
शुक्रवार को सुबह से ही दीवानी के सभी गेटों पर पुलिस और एसएसएफ ने चेकिंग शुरू कर दी। अधिवक्ताओं को पहचानपत्र देखकर प्रवेश दिया गया। वाहनों की चेकिंग की गई। वादकारियों को दीवानी आने का कारण पूछ कर अंदर जाने दिया। एसीपी हरीपर्वत भी फोर्स के साथ रहे।
दर्ज केस वापस न हुए तो आंदोलन
आगरा। दीवानी परिसर में हुए विवाद की घटना के बाद शुक्रवार को विभिन्न बार एसोसिएशनों की एक बैठक हुई। इसमें घटना की कड़ी निंदा की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि परिसर में बाहरी लोग आकर अधिवक्ताओं के साथ लगातार दुर्व्यवहार कर रहे हैं। पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अधिवक्ताओं ने कहा कि पवन समाधिया और उनके साथियों ने अधिवक्ता पर झूठा केस दर्ज कराया है। झूठे केस तत्काल प्रभाव से समाप्त करें। यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो अधिवक्ता समुदाय आंदोलन करेगा। बैठक में आगरा बार एसोसिएशन, द एडवोकेट बार एसोसिएशन, ग्रेटर बार आगरा, आंबेडकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव सहित कई बार के पदाधिकारी मौजूद रहे। ब्यूरो
- काले कोट पहने होने पर भी चेकिंग का विरोध
जनमंच के अध्यक्ष चौधरी अजय सिंह ने पुलिस एवं एसएसएफ की चेकिंग पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि चेकिंग के नाम पर काला कोट और बैंड लगाने वालों को भी चेक किया गया। गेट नंबर एक पर सांकेतिक धरना भी दिया। उन्होंने पूर्व में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव, अधिवक्ता रामखिलाड़ी वर्मा की हत्या एवं अधिवक्ता ओमवीर सिंह चौहान पर हुए प्राणघातक हमले का मुद्दा उठाया। अधिवक्ता संगठनों से अपील की कि वह मिल बैठकर जल्दी से जल्दी इस विवाद का निपटारा करें।