भाई की कर रहा था देखभाल
थानाध्यक्ष न्यू आगरा अरविंद कुमार निर्वाल ने बताया कि थाने लाकर बंदियों से पूछताछ की गई। इनमें से नगला बूढ़ी निवासी जीतू को दहेज हत्या के मामले में सात साल की सजा हुई थी। वह डेढ़ साल से बंद था। उसे 15 मई 2021 को पैराल मिली थी। उसे 13 सितंबर 2021 को जेल में दाखिल होना था।
पुलिस की पूछताछ में जीतू ने बताया कि उसका भाई बंगलूरू में रहता है। वह जूते की फैक्टरी में काम करता था। उसे लकवा मार गया। इस कारण वो भाई के पास चला गया। उसे अपने साथ लेकर आया। इसके बाद से वो भाई की सेवा में लगा हुआ था। इस कारण से जेल में नहीं जा सका।
जेल गया, नहीं दी जानकारी
पुलिस के मुताबिक, इसी तरह गांव जगनपुर निवासी बंदी नौबत सिंह का कहना था कि वो कारपेंटर का काम करता है। पैरोल अवधि खत्म होने के बाद वो जेल पर पहुंचा था। उसने कर्मचारियों से पूछताछ की। जेल में कब आने के बारे में पूछा। मगर, जेल के बाहर तैनात बंदीरक्षकों ने कोई जानकारी नहीं दी। इस पर वापस आ गया। उसे लगा कि पैरोल अवधि बढ़ा दी गई है।
उसके गांव के ही कल्लू उर्फ कुंवर सिंह ने बताया कि उसके पैर की हड्डी टूट गई थी। इस कारण चल फिर नहीं पा रहा था। वहीं गांव के हरवीर का कहना था कि उसे पैरोल अवधि समाप्त होने की जानकारी नहीं मिली थी। तीनों को गांव में 25 साल पहले एक खोखे में आगजनी के मामले में 3.5 साल की सजा हुई थी। पैरोल से पहले एक-एक साल की सजा काट चुके थे।