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जल्द ही कुछ रियायत दे सकती है सरकार

Mon, 21 Nov 2016 01:07 AM IST
जल्द ही कुछ रियायत दे सकती है सरकार
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जल्द ही कुछ रियायत दे सकती है सरकार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हजार-पांच सौ के नोट बंद कर दिए जाने से जनता को हो रही परेशानियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच रही हैं। विपक्ष के हल्ले के साथ सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी का भी उन पर कुछ न कुछ असर होता नजर आ रहा है। यही वजह है कि उन्होंने आगरा रैली में जोर देकर रहा कि हम लकीर के फकीर नहीं है, लचीला रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिए कि जल्द ही कुछ रियायत दी जा सकती है।
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आठ नवंबर को प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश में नोटबंदी का एलान किया था। तब शायद सरकार को पूरा अहसास नहीं था कि हजार पांच सौ के नोट अचानक बंद कर दिए जाने से जनता को कितनी और कैसी-कैसी तकलीफ सहन करनी होंगी।
यही वजह है कि सरकार रोज नई व्यवस्था लेकर सामने आ रही है। पहले नोट बदलने के  लिए 4000 रुपये की सीमा दी गई। फिर इसे बढ़ाकर 4500 रुपये किया गया। लेकिन बाद में घटाकर दो हजार कर दिया गया। इसके बाद पूरी तरह से बंद कर दिया गया। स्याही लगाने की व्यवस्था भी की गई।
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इसी तरह एटीएम से कैश निकालने पर भी सीमा बदल रही है। पहले दो हजार, फिर ढाई हजार। इसके बाद पेट्रोल पंप से भी नोट दिए जाने की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद विरोध नहीं थम रहा। पब्लिक की परेशानियां कम नहीं हो रहीं। शादी वाले घरों को 2.5 लाख दिए जाने के लिए कहा जरूर, पर अमल नहीं हो पाया।
तकलीफों के साथ गुस्सा भी बढ़ रहा है। शायद यही वजह है कि पीएम ने लचीला रुख अपनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकार लकीर की फकीर नहीं है। हर तीसरे दिन समीक्षा की जा रही है। उन्हें मालूम है कि लोगों को परेशानी हो रही है।

तो मजदूरों पर होगी मेहरबानी
आगरा। असोम के चाय बागानों के मजदूरों की साप्ताहिक मजदूरी का भुगतान किए जाने की व्यवस्था केंद्र सरकार कर चुकी है। इसके लिए मजदूरों की सत्यापित सूची ली गई थी। इसी के मद्देनजर आगरा के जूता कारखाना मालिकों ने मजदूरों के मेहनताने के साप्ताहिक भुगतान की छूट मांगी। उनकी मांग को सीएम अखिलेश यादव ने पीएम तक पहुंचाया। माना जा रहा है कि इस पर केंद्र सरकार जल्द ही निर्णय ले सकती है ताकि मजदूरों की परेशानी दूर हो।
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