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‘हमें हमारे हाल पर छोड़ दो प्लीज’

Wed, 16 Mar 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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‘हमें हमारे हाल पर छोड़ दो प्लीज’ - फोटो : अमर उजाला
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‘हम बहुत परेशान हैं, हमारी मजबूरी समझो, और परेशान न करो, हमें हमारे हाल पर छोड़ दो प्लीज....’ दिव्य के परिवारीजन अब हाथ जोड़कर सभी से आग्रह कर रहे हैं कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाए। पुलिस से इनका भरोसा पहले ही उठ चुका है। मंगलवार को मीडिया से भी दूरी बना ली। तमाम रिश्तेदार आपस में सलाह मश्विरा करने में लगे हैं कि इम्तिहान की इस मुश्किल घड़ी में क्या-क्या कदम उठाए जाएं। इनके लिए दिव्य के इंतजार में एक -एक पल एक -एक सदी की तरह गुजर रहा है। घड़ी पर नजर पड़ते ही गिनने लगते हैं कि अपहरण को कितनी घंटे बीत गए। दिव्य का अपहरण 13 मार्च की शाम सात बजे किया गया था। मंगलवार रात 12 बजे तक 53 घंटे बीत चुके थे लेकिन दिव्य का कोई सुराग नहीं लग पाया। जो भी घर पर आता है, यही पूछने लगता है कि अपहरण कैसे हुआ। कई लोग यह सवाल भी कर चुके हैं कि फिरौती के लिए फोन आया या नहीं? परेशान होकर ही इन लोगों को कहना पड़ा, ‘हमें हमारे हाल पर छोड़ दो प्लीज...।’
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सोशल मीडिया पर सलामती की दुआएं
दिव्य के अपहरण से सोशल मीडिया भी दुखी है। तमाम व्हाट्स एप ग्रुप और फेसबुक पर उसकी सलामती के लिए दुआएं की जा रही हैं। लोग कह रहे हैं कि भगवान, अपहर्ताओं को सद्बुद्धि दे और वे दिव्य को छोड़ दें। दिव्य के फोटो शेयर किए जा रहे हैं। उसके परिवार की सेल्फी का फोटो सबसे ज्यादा शेयर किया गया। लोगों में पुलिस के खिलाफ लोगों में गुस्सा भी नजर आ रहा है। कमेंट हैं, अगर बच्चे घर में भी सुरक्षित नहीं है, तो अफसर बताएं कि उन्हें कहां रखें?

 ‘किस हाल में होगा मेरा लाल’
दिव्य की मां नेहा वार्ष्णेय पूरे दिन बेचैनी में घर के अंदर इधर -उधर टहलती रहती हैं। फोन की घंटी बजते ही दौड़ती हैं। बार-बार पति प्रतीक से पूछती हैं, क्या हुआ, कुछ पता चला। हर बार जुबान पर यही होता है, ‘न जाने किस हाल में होगा मेरा लाल।’
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दादी की हालत बिगड़ी
दिव्य के परिवार में सभी का हाल बेहाल है। दादी शशि वार्ष्णेय पल भर के लिए भी आंखें बंद करती हैं, तो सामने वही दृश्य आ जाता है। उनकी आंखों के सामने ही दिव्य का अपहरण हुआ था। उनकी हालत कई बार बिगड़ चुकी है।

‘खिलौना नहीं, भइया चाहिए’
दिव्य का छोटा भाई काव्यांश तीन साल का है। अपहरण का मतलब भी नहीं समझता। भाई के साथ खेलने के लिए दिन में कई बार मचलता है। परिवार के लोग उसे खिलौना देते हैं तो गुस्से में उसे फेंक देता है। कहता है, ‘खिलौना नहीं, भइया चाहिए।’
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