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विद्युत निगम के खिलाफ सख्त हुई अदालत, पीड़िता को दिलाई 5.30 लाख की क्षतिपूर्ति

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कासगंज। विद्युत निगम की लापरवाही से युवक और मवेशी की मौत हो गई। पति की मृत्यु के बाद पत्नी ने मुआवजा मांगा, लेकिन निगम ने कोई सहारा नहीं दिया। पीड़िता दर-दर भटकती रही। जब उसे न्याय नहीं मिला तो उसने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। यहां उसे मात्र 65 दिन में 5.3 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मिल गई।
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मामला वर्ष 2017 के जुलाई माह का है। स्थायी लोक अदालत में कासगंज तहसील क्षेत्र के गांव नगला बिहारी निवासी सरोज देवी ने नवंबर माह में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। कहा कि उनके घर के सामने एक विद्युत पोल लगा हुआ है। पोल में करंट प्रवाहित हो रहा था। कई बार विद्युत निगम के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने नहीं सुनी। नतीजा 17 जुलाई वर्ष 2017 को करंट लगने से पति कैलाश चंद्र और भैंस की मौत हो गई। सूचना देने के बाद भी विद्युत निगम ने समस्या का समाधान नहीं किया और गांव के ही जगदीश भी करंट की चपेट में आकर झुलस गए।
पीड़िता ने स्थायी लोक अदालत से गुहार लगाई कि पति और मवेशी की मौत की एवज में मुआवजा दिलाया जाए। स्थायी लोक अदालत की पूर्ण पीठ के अध्यक्ष चंद्रशेखर प्रसाद, सदस्य बसंत शर्मा व डॉ. सपना अग्रवाल ने सुनवाई करते हुए विद्युत निगम के अफसरों को तलब किया। पीड़िता की ओर से दिए गए तर्क सही पाए गए। इस पर अदालत ने विद्युत निगम के अफसरों पर जुर्माना लगाया। क्षतिपूर्ति के रूप में 5.30 लाख रुपये पीड़िता को दिए जाने के आदेश दिए। विद्युत निगम ने 5.30 लाख रुपये न्यायालय में जमा करा दिए। स्थायी लोक अदालत की पूर्णपीठ ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति का चेक दे दिया है।
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- स्थायी लोक अदालत में मामले की सुनवाई की गई। इसमें विद्युत निगम के अफसर लापरवाह पाए गए। क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़िता को मुआवजा दिलाया गया है। यदि विद्युत निगम की लापरवाही के मामले कोई संज्ञान में लाएगा तो न्याय संगत कार्रवाई होगी।- बसंत शर्मा, सदस्य, स्थायी लोक अदालत।
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