प्राइवेट लैब में कोरोना जांच कराने वाले मरीज फर्जी नाम, पते व मोबाइल नंबर दर्ज करा रहे हैं। पांच दिन में ऐसे दो मामले मिले हैं। डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा है कि सैंपल रिपोर्ट नहीं आने तक संदिग्ध को होम क्वारंटीन में रहना पड़ेगा। वो घर या जिले से 36 घंटे तक बाहर नहीं जाएगा। कोई ऐसा करता है तो उस पर महामारी फैलाने के मामले में मुकदमा होगा।
उन्होंने बताया कि बीते दिनों दो ऐसे मरीज मिले। इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए जब रैपिड रिस्पांस टीम ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया तो मोबाइल बंद मिला। पता भी गलत लिखाया था। उन्हें सर्विलांस टीम की मदद से पकड़ा जा सका।
72 घंटे तक हो सकते हैं पाबंद
डीएम ने कहा कि सैंपलिंग के 24 घंटे में रिपोर्ट आ जाती है। 36 घंटे तक संदिग्ध की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग हो जाती है। अगर रिपोर्ट में किसी कारण से 48 घंटे या उससे अधिक समय लगता है तो संदिग्ध को 72 घंटे तक पाबंद रहना पड़ेगा। जब तक कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग नहीं हो जाए, वो बाहर नहीं जा सकता।
जिला अस्पताल से भाग चुके हैं मरीज
अप्रैल में जिला अस्पताल में ऐसे पांच मामले सामने आए जब मरीज सैंपल देने के बाद भाग गए। पुलिस ने उन्हें दूसरे दिन पकड़कर लाई। इनमें से दो मरीज शहर के, दो फतेहपुर सीकरी और एक सेवला का रहने वाला था। इसके बाद सैंपलिंग सेंटर पर ऐसे लोगों की निगरानी के लिए पुलिस लगाई गई।
कड़कडूमा में मरीज, तलाश हो रही आगरा में
दिल्ली के पांच पॉजिटिव आगरा के खाते में जुड़ गए। गाजियाबाद की कोरोना जांच करने वाली एक प्राइवेट लैब की गलती से ऐसा हुआ। पॉजिटिव केस की आगरा में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग शुरू हुई तो मरीज कड़कड़ूमा एंकलेव, विश्वास नगर शाहदरा, बिहारी कॉलोनी शाहदरा, राधे पुरी और अर्जुन नगर (सभी दिल्ली) के निवासी निकले।
डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा कि इस मामले में लैब को चेतावनी दी गई। इसके बाद लैब ने गलत फीड हुए मरीजों का ब्योरा आगरा के कोविड पोर्टल से हटा लिया है।