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तालाबों पर कब्जा कर खड़ी कर दीं इमारतें, बारिश में सड़कें बन जाती हैं तालाब

Sat, 24 Oct 2020 02:21 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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सेंट जोंस चौराहे के पास जलभराव (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में शहर से लेकर देहात तक तालाबों पर अवैध कब्जे करके वहां बहुमंजिला इमारतें, पंचायत घर, व्यवसायिक कांपलेक्स खड़े कर दिए गए। जब तालाबों पर कब्जा हुआ तो बारिश के पानी ने शहर की सड़कों को ही तालाब में तब्दील कर दिया। 

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शहर में 27 तालाबों पर अवैध निर्माण करके कब्जा कर लिया गया, जिससे शहर में 22 जगह जलभराव की समस्या स्थाई हो गई। तोता का ताल, मदिया कटरा, बाग फरजाना, खंदारी, आवास विकास कॉलोनी, नरीपुरा समेत जलभराव के स्थाई पॉइंट बन गए।


ये बन गए जलभराव के स्थाई स्थान

नगर निगम जलभराव के कारण मानसून में स्थाई रूप से पंपसेट लगाकर पानी निकालता है। दरअसल, तालाबों का कैचमेंट एरिया धीमे धीमे खत्म करने के बाद बारिश का पानी खुद-ब-खुद वहीं भरता है। इन जगहों में भीम नगर, सिकंदरा, राधा नगर, राहुल नगर, हमीद नगर, दरगाह कमाल खां, खेरिया मोड़, सोहल्ला, बोदला, खवासपुरा, नरीपुरा, राधे वाली गली, जहां पर निगम के पंप स्थाई रूप से लगे हुए हैं।

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इसके अलावा शास्त्रीपुरम, शंकरगढ़ की पुलिया, सेक्टर 4, तोता का ताल, बाग फरजाना, खंदारी, बलकेश्वर, शाहगंज, साकेत कॉलोनी, गोविंद नगर, कैलाशपुरी, आजमपाड़ा, सुभाष नगर, बालाजीपुरम, अवधपुरी, बिचपुरी रोड पर जलभराव स्थाई हो चुका है। इन सभी जगहों पर तालाब खत्म कर दिए गए।

जलाधिकार के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने बताया कि तालाब खत्म करने से भूगर्भ जल स्तर नीचे गया और जलभराव की समस्या बढ़ गई। आगरा शहर में जलभराव उन्हीं जगहों पर ज्यादा है जहां-जहां तालाबों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की गई हैं।

ड्रेनेज विशेषज्ञ राजीव सक्सेना ने बताया कि हर तालाब का अपना केचमेंट एरिया होता है जहां बारिश का पानी बहकर खुद-ब-खुद उस तालाब तक पहुंचता है लेकिन वहां इमारतें बनाने, निर्माण करने से जलभराव तो होगा ही। वह पानी आखिर कहां जाएगा।
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20 साल में बढ़ गई जलभराव की समस्या

सिंचाई विभाग से रिटायर्ड 83 साल के रामप्रकाश चौधरी का कहना है कि आगरा नहरों और नालों के बेहतरीन नेटवर्क का शहर है। 20 साल पहले इक्का-दुक्का जगह जलभराव दिखता था, लेकिन जब से तालाबों पर कब्जे शुरू हुए और बहुमंजिला इमारतें बनी हैं, तब से हर सड़क पर जलभराव देखने को मिला। बाग फरजाना दिल्ली गेट का पानी मदिया कटरा की ओर बने ताल में जाता था। 

इसी तरह शाहगंज में डीसी वैदिक इंटर कॉलेज के सामने का तालाब हमने देखा है। साकेत कॉलोनी गोविंद नगर क्षेत्र का पूरा पानी कोठी मीना बाजार के तालाब में आता था, जबकि पृथ्वीनाथ फाटक आजमपाड़ा शंकरगढ़ की पुलिया का पानी पृथ्वीनाथ फाटक के पास के ताल में पहुंचता था। इससे सड़कों पर जलभराव की समस्या नहीं थी। अब इन सभी जगहों पर निर्माण हो चुके हैं।
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