इसके अलावा शास्त्रीपुरम, शंकरगढ़ की पुलिया, सेक्टर 4, तोता का ताल, बाग फरजाना, खंदारी, बलकेश्वर, शाहगंज, साकेत कॉलोनी, गोविंद नगर, कैलाशपुरी, आजमपाड़ा, सुभाष नगर, बालाजीपुरम, अवधपुरी, बिचपुरी रोड पर जलभराव स्थाई हो चुका है। इन सभी जगहों पर तालाब खत्म कर दिए गए।
जलाधिकार के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने बताया कि तालाब खत्म करने से भूगर्भ जल स्तर नीचे गया और जलभराव की समस्या बढ़ गई। आगरा शहर में जलभराव उन्हीं जगहों पर ज्यादा है जहां-जहां तालाबों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की गई हैं।
ड्रेनेज विशेषज्ञ राजीव सक्सेना ने बताया कि हर तालाब का अपना केचमेंट एरिया होता है जहां बारिश का पानी बहकर खुद-ब-खुद उस तालाब तक पहुंचता है लेकिन वहां इमारतें बनाने, निर्माण करने से जलभराव तो होगा ही। वह पानी आखिर कहां जाएगा।
सिंचाई विभाग से रिटायर्ड 83 साल के रामप्रकाश चौधरी का कहना है कि आगरा नहरों और नालों के बेहतरीन नेटवर्क का शहर है। 20 साल पहले इक्का-दुक्का जगह जलभराव दिखता था, लेकिन जब से तालाबों पर कब्जे शुरू हुए और बहुमंजिला इमारतें बनी हैं, तब से हर सड़क पर जलभराव देखने को मिला। बाग फरजाना दिल्ली गेट का पानी मदिया कटरा की ओर बने ताल में जाता था।
इसी तरह शाहगंज में डीसी वैदिक इंटर कॉलेज के सामने का तालाब हमने देखा है। साकेत कॉलोनी गोविंद नगर क्षेत्र का पूरा पानी कोठी मीना बाजार के तालाब में आता था, जबकि पृथ्वीनाथ फाटक आजमपाड़ा शंकरगढ़ की पुलिया का पानी पृथ्वीनाथ फाटक के पास के ताल में पहुंचता था। इससे सड़कों पर जलभराव की समस्या नहीं थी। अब इन सभी जगहों पर निर्माण हो चुके हैं।