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Agra: विश्वविद्यालय में एक और 'खेल' का खुलासा, अधूरे कार्य पर एजेंसी को कर दिया 25.70 लाख का भुगतान

Thu, 03 Nov 2022 05:17 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

अलीगढ़ विश्वविद्यालय से जुड़े 408 कॉलेजों के रिकॉर्ड की स्कैनिंग नहीं कराई थी। एजेंसी ने बिना स्कैनिंग के ही डाटा पैन ड्राइव में विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा दिया। विश्वविद्यालय ने भी भुगतान कर दिया। 
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में अफसरों का एक और खेल सामने आया। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के कॉलेजों के रिकॉर्ड का डाटा देने वाली एजेंसी को अधूरे कार्य पर ही पूरा भुगतान कर दिया। कंपनी के भुगतान के लिए बाकायदा अफसरों ने सिफारिश भी की।

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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से 2020-21 में करीब 900 कॉलेज संबद्ध थे। 2021-22 में अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ और अलीगढ़ मंडल के 408 कॉलेज अलीगढ़ विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिए। इन कॉलेजों के रिकॉर्ड, चार्ट, संबद्धता समेत अन्य पत्रावली तैयार करने के लिए एजेंसी को 25.70 रुपये में ठेका दिया गया। 

पैन ड्राइव में दे दिया डाटा 

इसमें रिकॉर्ड सॉफ्ट और हार्ड कॉपी में देने थे। इनमें एक स्कैनिंग कर एक काॉपी डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को देनी थी। लेकिन एजेंसी हार्ड कॉपी न देकर रिकॉर्ड पैन ड्राइव में विश्वविद्यालय के अफसरों को उपलब्ध करा दिया। इसके बावजूद अफसरों ने सिफारिश करते हुए बिल का भुगतान करवा दिया। अभी आगरा विश्वविद्यालय के पास अलीगढ़ विश्वविद्यालय से संबद्ध हुए रिकॉर्ड का डाटा हार्ड कॉपी में नहीं है। 

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तत्कालीन वित्ताधिकारी, कुलसचिव पर भी जांच की जद में

इस एजेंसी को का भुगतान भी प्रो. विनय पाठक के प्रभारी कुलपति रहने के दौरान किया था। इसमें तत्कालीन कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, वित्ताधिकारी पर अंगुली उठी। विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं ने इसमें धांधली का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन भी किए, लेकिन इस मामले की जांच नहीं कराई। 

'पुराने अफसरों के समय का है मामला'

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशू रानी ने कहा कि मैंने बीते महीने ही कार्यभार संभाला है। वर्तमान कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक भी उस वक्त तैनात नहीं थे। ये पुराने मामले हैं और उस दौरान के अफसर अभी तैनात नहीं हैं। इस मामले की अलीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति से पता करती हूं, वैसे एसटीएफ अब जांच कर ही रही है।
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