शमसाबाद निवासी माता प्रसाद ने बताया कि अपनी कमर के दर्द की दवा लेने के लिए शुक्रवार को एसएन अस्पताल आए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 4 हजार रुपये में एमआरआई कराई, लेकिन जब वे दवा लेने काउंटर पर गए तो उन्हें 6 दवाओं में से केवल 4 ही निशुल्क मिलीं। बाकी दो दवाएं उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ेंगी। बोले कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, महंगी दवाएं खरीदना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
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सिकंदरा निवासी विजय कुशवाह ने कहा कि चेहरे की स्किन की समस्या के इलाज के लिए अस्पताल आए थे। उन्होंने बताया कि दवा लेने के लिए उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ा और पर्ची पर लिखी 8 दवाओं में से सिर्फ दो ही मुफ्त में मिलीं। बाकी 6 दवाएं उन्हें बाहर से 1940 रुपये में खरीदनी पड़ रही हैं। ऐसी सरकारी व्यवस्था का क्या फायदा जहां दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सोचा था कि सरकारी अस्पताल में इलाज सस्ता होगा, लेकिन यहां तो निजी अस्पताल से भी ज्यादा महंगा पड़ रहा है।
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