कोसीकलां जैन मंदिर में प्रवचन करती आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी। संवाद
- फोटो : KOSI
कोसीकलां। जैन समाज के दशलक्षण पर्व रविवार से शुरू हो गए। दस दिन तक जैन समाज के लोग आराधना, व्रत करेंगे। पहला दिन उत्तम क्षमा धर्म के रूप में मनाया। आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ने उत्तम क्षमा धर्म का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि क्षमा ही वह शक्ति है, जिसमें वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति मिलती है।
समाज के लोगों ने प्रात: काल जिन बिम्बों के अभिषेक और शांति धारा के बाद नित्य नियम पूजा की। खेड़े वाले जैन मंदिर में आर्यिका सृष्टि भूषण माताजी ने प्रवचन में स्वयं को जीने की कला बताई। उन्होंने कहा कि जिसने अपने आप को अपने अहम को अपने राग को जीत लिया, जिसने दूसरों के प्रति कषाय भाव को तज दिया, वही जिन धर्म का अनुयायी हो गया।
जिनेंद्र भगवान को मानने वाले किसी पंथ विशेष के लोग नहीं हैं, जो भी उनके बताए मार्ग पर चलेगा वही जैन है। जैन विद्वान जिनेंद्र शास्त्री ने उत्तम क्षमा धर्म की व्याख्या की। भोपाल की विजय रंगीला पार्टी ने संगीतमय भजन पेश किए। समाज के अध्यक्ष सुभाष जैन, कैलाश चंदौरिया, अशोक कांमिया, राहुल जैन कांमिया, राजेंद्र जैन किताब वाले, विनोद जैन, प्रेमचंद जैन, सोमराज जैन, नवीन जैन, प्रवीन जैन आदि थे।