आगरा। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, ओल्ड ईदगाह कॉलोनी में मंगलवार को जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और विश्वशांति महायज्ञ का आगाज हुआ। सुबह क्षेत्र में घटयात्रा निकाली गई। इसमें पूरा दिगंबर जैन समाज उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश धारण करके भगवान का गुणगान करते हुए चल रही थीं। कार्यक्रम में दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
मुनि वीर सागर, मुनि विशाल सागर व मुनि धवल सागर के सानिध्य में बैंडबाजों के साथ धूमधाम से घटयात्रा निकाली गई। ओल्ड ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से शुरू होकर यात्रा अयोध्या नगरी के रूप में सजाए गए पंडाल में पहुंचीं। मुनि वीर सागर महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक में शामिल होने से ही काम नहीं चलेगा, उसकी क्रियाओं को अपनाएं भी।
प्रवचन के बाद एचएल बैनाड़ा, निर्मल मोठ्या व राजेश मोठ्या ने ध्वजारोहण किया। पहले दिन शांतिधारा व अभिषेक के साथ अमृतधारा, मंडप शुद्धि, मंडप प्रतिष्ठा की क्रियाएं संपन्न हुईं। शाम को आचार्य भक्ति आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। आयोजन में राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा व अन्य राज्यों के करीब 3000 श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मुख्य संयोजक अमित जैन रिंकू, सहसंयोजक अनिल जैन, अमित जैन, मुरारीलाल जैन, दिलीप जैन, सुभाष चंद जैन, मुकेश जैन, शारदा जैन, पायल जैन, अनीषा जैन, रश्मि जैन, दीपाली, रुचि जैन आदि मौजूद रहे।
मुनि विशाल सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि पान, गुटका खाकर पंडाल में प्रवेश न करें। पंचकल्याणक का लाभ तभी मिलेगा जब त्याग करेंगे। अशुद्ध व काले वस्त्रों में भी पंडाल में प्रवेश न करें। इसके अलावा कॉस्मेटिक चीजों से शृंगार करके भी प्रवेश न करें।
मुझे तीसरे पंचकल्याणक में शामिल होने का लाभ मिल रहा है। पंचकल्याणक सभी का कल्याण करने वाला होता है। मुनिश्री के प्रवचन सही राह दिखाते हैं। - आलोक जैन, दिल्ली
पंचकल्याणक की वजह से पहली बार आगरा आने का सौभाग्य मिला है। पत्नी भी साथ आई हैं। पूरे छह दिन यहां रुककर पंचकल्याणक का लाभ उठाऊंगा। - दुलीचंद जैन, राजकोट
इस बार पंचकल्याणक का भव्य आयोजन किया गया है। इसे देखकर बच्चों में धर्म के प्रति लगाव बढ़ेगा। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही मार्ग मिलेगा। - मीरा जैन, ताजगंज
पंचकल्याणक में शामिल होने के लिए दूसरे राज्यों से भी लोग आए हैं। उनकी देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय श्रद्धालुओं को दी गई है। आयोजन से मन में अजीब सा उत्साह है। - रेखा जैन, छीपीटोला