डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पास करीब 1500 साल पुराना दुर्लभ खजाना है। इसमें पांडुलिपि, ताड़पत्र, भोजपत्र समेत अन्य ग्रंथ हैं। संग्रहालय बनाने से पहले इनका केमिकल संरक्षण किया जाएगा। नमूने के तौर पर दो पांडुलिपियों पर कार्य शुरू हो गया है।
संग्रहालय के समन्वयक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि बीते महीने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने केएमआई में रखे ताड़पत्र, भोजपत्र, मुगलकालीन 14 सिक्के और 1450 से अधिक पांडुलिपियां देखी थीं। उन्होंने संग्रहालय बनाकर इनको संरक्षित करने के लिए निर्देशित किया था।
इसके बाद कुलपति प्रो. आशु रानी ने बीते सप्ताह केमएआई में रखे दुर्लभ साहित्य और पांडुलिपियों का हाल देखा था। इसमें 1500 साल से अधिक पुराने साहित्य, ग्रंथ और अन्य सामान का रासायनिक संरक्षण करवाने का निर्णय लिया। विशेषज्ञ से सर्वे भी कराया गया है। अति प्राचीन होने के कारण इनकी केमिकल क्लीनिंग कराई जाएगी। नमूने के तौर पर विशेषज्ञ से दो पर कार्य शुरू हो गया है। रासायनिक संरक्षण होने के बाद इनका ई-संग्रहालय भी बनेगा। इससे इनकी मूल कॉपी भी सुरक्षित रहेगी और लोग इनको देख भी सकेंगे।
विश्वविद्यालय के पास दुर्लभ खजाना
- दिल्ली के लाल किले का मूल नक्शा
- बल्केश्वर से ताजमहल तक यमुना घाट पर बनी इमारतों का नक्शा
- कनिष्क और अकबर के समय के सोने के सिक्के
- ताड़पत्रों पर लिखे साहित्य व ग्रंथ
- भोजपत्र पर लिखे साहित्य व ग्रंथ